कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया- खेती का बजट घटा, वित्त मंत्री ने देशवासियों को दिया धोखा

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नई दिल्ली
कांग्रेस पार्टी ने बजट 2021 को ‘खोदा पहाड़, निकली चुहिया’ करार दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने अगले वित्त वर्ष के बजट को लेकर सोमवार को आरोप लगाया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के लोगों को धोखा दिया है और इससे पहले कभी भी बजट से इतनी निराशा नहीं हुई। पूर्व वित्त मंत्री ने पत्रकारों से कहा, ‘वित्त मंत्री ने भारत के लोगों खासकर गरीबों, कामकाजी तबके, मजूदरों, किसानों, स्थायी रूप से बंद हुईं औद्योगिक इकाइयों और बेरोजगार हुए लोगों को धोखा दिया है। उन्होंने उनका भाषण सुन रहे सांसदों समेत उन सभी लोगों के साथ धोखा किया है जिनको इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी कि पेट्रोल एवं डीजल समेत कई उत्पादों पर उपकर लगा दिया गया है।’

चिदंबरम ने कहा कि वित्त मंत्री ने अपने भाषण में रक्षा समेत कई महत्वपूर्ण विषयों का उल्लेख नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘सरकार से बड़ी उम्मीदें थी कि खर्च में बढ़ोतरी की जाएगी ताकि निजी निवेश और उपभोग को बढ़ावा मिल सके, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि मामूली बढ़ोतरी हुई है जो 34,50,305 करोड़ रुपये से बढकर 34,83,236 करोड़ रुपये हो गया है।’

पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, ‘इस बजट से इतनी निराशा हुई है जितनी कभी नहीं हुई। पिछले साल की तरह इस बजट की सच्चाई सामने आ जाएगी।’ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया, ‘इस बजट का नाम धोखेबाज बजट है। इसमें सिर्फ लोगों को धोखा दिया गया है।’

कांग्रेस बोली- डिफेंस बजट में एक फूटी कौड़ी नहीं बढ़ाई
चिदंबरम ने कहा कि जो चीजें देश की सुरक्षा और अस्मिता के लिए आवश्यक हैं, वित्त मंत्री ने उसकी चर्चा तक नहीं की। उदाहरण के तौर पर डिफेंस बजट में एक फूटी कौड़ी नहीं बढ़ाई है। ऐसे समय में जब चीन हमारी सरजमीं पर कब्जा किए हुए है, रक्षा बजट की चर्चा तक न करना, इस देश की सरकार की प्राथमिकताओं में खामी की ओर इशारा करता है। कोरोना काल में स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण पहलू है पर वह भी धोखे पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि अगर वित्त कमीशन, वैक्सीनेशन के खर्च को निकाल दिया जाए तो यहां तक कि पीने के पानी और सैनिटेशन का बजट भी स्वास्थ्य में जोड़कर फेल जादूगर की आंकड़ों की मायावी जादूगरी पेश करने की कोशिश की गई। जिस प्रकार से राजकोषीय घाटा और वित्तीय घाटा लगभग साढ़े 9-10 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह निवेशकों और देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। सरकारी खर्चे में एक पैसे की बढ़ोतरी न करना- जिससे अर्थव्यवस्था और रोजगार दोनों उत्पन्न होते, यह सरकार की गलत प्राथमिकताओं को दिखाता है।

सबसे बड़ा धोखा खेती के साथ किया गया। इसका बजट लगभग 6 प्रतिशत काट दिया गया। मार्केट इंटरवेंशन स्कीम को 2000 करोड़ से 1500 करोड़ कर दिया गया और पीएम किसान योजना में 13 प्रतिशत की कटौती कर दी गई। लघु और छोटे उद्योगों को बड़ा झटका देते हुए मात्र 15,700 करोड़ रुपये की घोषणा की गई। यह ऐसे ही है जैसे एक भूखे हाथी को एक मुट्ठी घास दे दी जाए।

चिदंबरम ने कहा कि सभी सरकारी बैंकों, जो इस देश की गरीब की राहत का आधार है, उस पर तालाबंदी करने की ओर कदम बढ़ाया गया। नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग के साथ बड़ा धोखा हुआ, एक फूटी कौड़ी की राहत नहीं मिली, जो भी प्रावधान किए गए वो केवल चंद लोगों की मदद करेंगे। यह बजट हर पायदान पर औंधे मुंह गिरा है और इसका एक शब्द में सार है- धोखा।

चिदंबरम ने आगे कहा कि 40 मिनट तक बजट पेश करने के बाद भी राजकोषीय घाटा और वित्तीय घाटा पैरा 141 पर आया। जब वित्तीय घाटा बढ़कर करीब 10 प्रतिशत के करीब हो जाए, यह दिखाता है कि अर्थव्यवस्था की हालत कितनी पतली है। अब अगर वित्त मंत्री 141 पैरा तक राजकोषीय घाटा छिपाने का प्रयास करें तो शायद इसे छिपाने के पीछे जांच ED और सीबीआई को दे देना चाहिए, आजकल उनके पास कम काम है।

जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, वहां से संबंधित योजनाओं की घोषणा पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में चिदंबरम ने कहा कि मतदाता मूर्ख नहीं हैं। वे जानते हैं कि इन घोषणाओं के लिए बजट का कोई प्रावधान नहीं है। इसके लिए एक रुपया नहीं है। इससे पहले कई चरणों में अप्रूवल होगा। फिलहाल यह घोषणा ही है।

(भाषा से इनपुट के साथ)