संसद की कैंटीन में सब्सिडी खत्म, कितना होता था खर्च, कितनी होगी बचत, जानें सबकुछ

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नई दिल्ली
भारतीय संसद की कैंटीन में खाना अब महंगा हो जाएगा क्योंकि यहां मिलने वाली सब्सिडी को अब पूरी तरह से कम कर दिया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को बताया कि संसद की कैंटीन में सांसदों, अन्य को खाने पर दी जाने वाली सब्सिडी बंद कर दी गई है। बिरला ने इससे जुड़े वित्तीय पहलुओं के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

सब्सिडी पर अक्सर होता रहा है विवाद, वायरल हुई थी रेट लिस्ट
संसद की कैंटीन में बेहद कम रेट पर खाना मिलने की वजह से कई बार विवाद भी हुआ है। कई लोगों ने टैक्सपेयर्स के खर्चे पर बेहद सस्ते भोजन का आनंद लेने वाले सांसदों पर आपत्ति जताई है। हालांकि कुछ लोगों ने यह भी बताया कि कैंटीन को मिलने वाली सब्सिडी का लाभ सिर्फ सांसदों को ही नहीं मिलता है, क्योंकि संसद के अन्य कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी भी कैंटीन में ही भोजन करते हैं। संसद की कैंटीन की रेट लिस्ट भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी।

सालाना 8 करोड़ रुपये की बचत
हालांकि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सब्सिडी खत्म करने की जानकारी देते हुए इसके वित्तीय पहलुओं के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। फिर भी सब्सिडी खत्म होने के बाद लोकसभा सचिवालय को हर साल करीब 8 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। आपको बता दें कि बीते 52 सालों से संसद की कैंटीन का संचालन उत्तर रेलवे करता है। उसके अधिकारियों के मुताबिक, संसद की कैंटीन से मिलने वाला सालाना रेवेन्यू करीब 17-18 करोड़ रुपये होता है। उत्तर रेलवे को यह भुगतान संसद के जरिए वित्त मंत्रालय करता है। हालांकि इस साल से कैटरिंग का काम इंडियन टूरिज्म डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन (ITDC) देखेगा।

सारी सब्सिडी सांसदों के खाने पर ही नहीं खर्च होती
बता दें कि संसद की कैंटीन को मिलने वाली सारी सब्सिडी सिर्फ सांसदों के खाने पर खर्च नहीं होती बल्कि कैंटीन के अन्य खर्च भी इसे पैसे से होते हैं जिनमें कैंटीन स्टाफ की सैलरी भी शामिल है। अलबत्ता संसद के अन्य कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी भी कैंटीन में ही भोजन करते हैं। 2015 में दायर की गई एक RTI के मुताबिक, संसद सत्र के दौरान और जब सत्र नहीं चल रहा था, कैंटीन में बिक्री लगभग समान थी। उसी आरटीआई से पता चला था कि कैंटीन को सालान 14 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिलती है जिसमें से 11-12 करोड़ रुपये स्टाफ की सैलरी में खर्च हो जाती है।

बेहद सस्ता होता है संसद की कैंटीन में खाना
जानकारी के मुताबिक कैंटीन की रेट लिस्ट में चिकन करी 50 रुपए में तो वहीं वेज थाली 35 रुपए में परोसी जाती है। वहीं, थ्री कोर्स लंच की कीमत 106 रुपए निर्धारित है। बात करें साउथ इंडियन फूड की तो संसद में प्लेन डोसा मात्र 12 रुपए में मिलता है। एक आरटीआई के जवाब में 2017-18 में यह रेट लिस्ट सामने आई थी। इसके अलावा वहां सब्जियां महज 5 रुपये में तो फ्राइड फिश और चिप्स 25 रुपये में मिलता रहा है। मटन कटलेट 18 रुपये में, मटन करी 20 रुपए में और करीब 100 रुपये की नॉनवेज थाली सिर्फ 33 रुपए में मिलती रही है।

बीजेडी सांसद ने उठाई थी सब्सिडी खत्म करने की मांग
2015 में एक रिपोर्ट में सामने आया था कि कैंटीन में खाने की लागत पर 80 फीसदी तक सब्सिडी दी जाती है। उस समय बीजू जनता दल (BJD) के सांसद बैजयंत जय पांडा ने स्पीकर को चिट्‌ठी लिखकर सब्सिडी खत्म करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि जब सरकार आर्थिक रूप से मजबूत लोगों से LPG सब्सिडी वापस करने के लिए कह रही है तो सांसदों से भी कैंटीन में सब्सिडी की सुविधा वापस ले लेनी चाहिए।

सबके खाने पर सब्सिडी खत्म हुई है या नहीं इसको लेकर सस्पेंस
दिसंबर 2019 की बैठक में जब सब्सिडी खत्म करने का फैसला लिया गया तो कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि इस कदम से संसद में आने वाले सैकड़ों कर्मचारियों और मीडियाकर्मियों को मुश्किल हो सकती है। चौधरी ने कहा कि उनसे खाने के लिए ज्यादा पैसे देने की उम्मीद करना अनुचित होगा और सुझाव दिया कि सब्सिडी केवल सांसदों के लिए ही खत्म की जाए। सत्ता पक्ष के कुछ सांसदों ने भी इस बात पर उनका समर्थन किया था। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है सब्सिडी खत्म करने का पूरा रोडमैप किस तरह का होगा।