योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष बोले- कृषि कानूनों पर बातचीत के जरिए आम सहमति बनाए केंद्र सरकार

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हैदराबाद
कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के बीच योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने बुधवार को केंद्र सरकार से अपील की है कि वह किसानों से बातचीत करे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से कानून पर चर्चा के माध्यम से लोगों के बीच आम सहमति बनाने की जरूरत है।

अहलूवालिया से जब पूछा गया कि कृषि कानूनों को लेकर मौजूदा गतिरोध को कैसे समाप्त किया जा सकता है, तो उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि एक सामान्य बात यह उठती है कि जब आप सुधार करते हैं जो लोगों को प्रभावित करने वाले होते हैं, तो आम सहमति बनाने के लिए चर्चा और भागीदारी सर्वसम्मति बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि आपको कदम पीछे खींचने की ज़रूरत है और आपको लोगों से बात करनी होगी।

अहलूवालिया ने कहा कि मुझे नहीं पता कि नवीनतम स्थिति क्या है, लेकिन अच्छी खबर यह है कि वार्ता जारी है। हालांकि, कोई नहीं कह रहा है कि कोई समाधान निकल गया है। उनके अनुसार, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि देश को कृषि बाजारों में सुधार करने और इसे गति देने के लिए निजी क्षेत्र में लाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि एक सामान्य धारणा थी कि नए कृषि कानूनों को लाने की पूरी कवायद जल्दबाजी और संसद के माध्यम से शुरू की गई थी।

बता दें कि सितंबर 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ विशेषकर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हजारों किसान दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर लगभग दो महीने से अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार प्रदर्शनकारी किसानों के साथ विचार-विमर्श कर रही है।हालाँकि अभी तक गतिरोध कायम है।

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर दुव्वुरी सुब्बाराव के साथ एक डिजिटल बातचीत के दौरान अहलूवालिया ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण देश का बढ़ता राजकोषीय घाटा प्रमुख चिंताओं में से एक है और इसे जारी नहीं रहने दिया जा सकता है, क्योंकि यह निजी क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त जगह नहीं देता है।