डोकलाम में मुंह की खाने के बाद ‘ड्रैगन’ ने चली नई चाल, अरुणाचल में बसा डाला आधुनिक गांव, देखें

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डोकलाम विवाद में करारी शिकस्‍त के बाद टेंशन में आए चीन ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा के करीब 4.5 किमी अंदर गांव बसा लिया है। यह इलाका अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में स्थित है। इस चीनी गांव की सैटलाइट तस्‍वीर आने के बाद अब अंदर की तस्‍वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं। इन तस्‍वीरों में नजर आ रहा है कि चीनी गांव में चौड़ी सड़कें और बहुमंजिला इमारतें बनाई गई हैं। बताया जा रहा है कि चीनी गांव में करीब 101 घर बनाए गए हैं। इन घरों में चीनी लोगों को बसाया गया है। घरों के ऊपर चीनी झंडा भी लगाया गया है। ड्रैगन की इस नई चाल के पीछे चीनी राष्‍ट्रपति की एक कुटिल योजना सामने आ रही है जिसके तहत 600 गांव बसाए जा रहे हैं। आइए समझते हैं पूरा मामला…..
China Arunachal India Village Pictures: चीन ने अरुणाचल प्रदेश में भारत की सीमा के अंदर एक आधुनिक गांव बसा लिया है। माना जा रहा है कि यह गांव चीनी राष्‍ट्रपति के आदेश पर बनाए जा रहे 600 गांवों में से एक है। इन 600 गांवों के पीछे चीनी ड्रैगन की एक कुटिल चाल छिपी हुई है।
डोकलाम विवाद में करारी शिकस्‍त के बाद टेंशन में आए चीन ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा के करीब 4.5 किमी अंदर गांव बसा लिया है। यह इलाका अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में स्थित है। इस चीनी गांव की सैटलाइट तस्‍वीर आने के बाद अब अंदर की तस्‍वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं। इन तस्‍वीरों में नजर आ रहा है कि चीनी गांव में चौड़ी सड़कें और बहुमंजिला इमारतें बनाई गई हैं। बताया जा रहा है कि चीनी गांव में करीब 101 घर बनाए गए हैं। इन घरों में चीनी लोगों को बसाया गया है। घरों के ऊपर चीनी झंडा भी लगाया गया है। ड्रैगन की इस नई चाल के पीछे चीनी राष्‍ट्रपति की एक कुटिल योजना सामने आ रही है जिसके तहत 600 गांव बसाए जा रहे हैं। आइए समझते हैं पूरा मामला…..
​भारतीय इलाके पर वर्ष 1959 से चीनी कब्‍जा, अब बसाया गांवसैटलाइट तस्‍वीरों से खुलासा हुआ है कि चीन ने अपना यह गांव भारत के त्‍सारी चू नदी के किनारे बसाया है। भारत के रक्षा सूत्रों के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश के इस इलाके पर चीन का वर्ष 1959 से कब्‍जा है। चीनी सेना ने कुछ साल पहले ही यहां पर अपनी एक सैन्‍य चौकी भी स्‍थापित की थी जो समुद्र तल से करीब 2700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। उन्‍होंने कहा कि चीनी सेना ने डोकलाम की घटना के बाद अब इस इलाके में अपनी गतिविधियों को बढ़ा दिया है। चीन ने वर्ष 1959 में असम राइफल्‍स को हटाकर इस इलाके पर कब्‍जा कर लिया था। इसके बाद से यह इलाका चीनी सेना के नियंत्रण में है। यही नहीं चीनी धीरे-धीरे लगातार इस विवादित इलाके पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। 1962 की जंग के बाद चीनी सेना पीछे चली गई थी लेकिन अक्‍साई चिन और अरुणाचल प्रदेश के इलाके में अभी भी बनी हुई है। ताजा घटना से पहले वर्ष 1990 के दशक के अं‍तिम वर्षों में चीन ने इस इलाके में सड़कों का जाल बिछाया।
​डोकलाम के बाद शी जिनपिंग ने रची गांव बसाने की चालवर्ष 2017 में डोकलाम में भारतीय सेना के हाथों मुंह की खाने के बाद चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग हरकत में आए और उन्‍होंने तिब्‍बत में ‘बॉर्डर डिफेंस विलेज’ बनाने की शुरुआत की। तिब्‍बती संगठनों का कहना है कि चीनी राष्‍ट्रपति का गांव बसाने का मकसद तिब्‍बत और बाकी दुनिया के बीच एक ऐसा ‘सुरक्षा बैरियर’ बनाना था जो अभेद्य हो। माना जा रहा है कि अरुणाचल प्रदेश में बसाया गया गांव भी चीनी राष्‍ट्रपति के अजेंडे का हिस्‍सा है। सेव तिब्‍बत संगठन के मुताबिक इन गांवों में चीन की सत्‍तारूढ़ कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के कार्यकर्ताओं को बसाया जा रहा है। इसके जरिए चीनी की कोशिश दलाई लामा के समर्थकों की तिब्‍बत में घुसपैठ को रोकना और कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के हितों को साधना है। उसने कहा कि चीन ने तिब्‍बत की राजधानी ल्‍हासा को चीन के सिचुआन से जोड़ने के लिए रेलवे टनल ब्रिज बनाया है। इस पुल का रणनीतिक रूप से बेहद अहम भारत की सीमा तक रेलवे को लाने में बहुत महत्‍वपूर्ण योगदान है।
​शी जिनपिंग के निर्देश पर अरुणाचल सीमा पर बन रहे गांवचीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग ने तिब्‍बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा और भारतीय खतरे को ध्‍यान में रखकर कुछ समय पहले कहा था, ‘एक देश को अच्‍छे से संचालित करने के लिए सबसे पहले उसकी सीमाओं को ठीक ढंग से काबू में करना होगा और सीमाओं को काबू में करने के लिए हमें तिब्‍बत में स्थिरता लाना होगा।’ चीनी राष्‍ट्रपति के निर्देश पर चीन ने वर्ष 2017 में तिब्‍बत सीमा पर 600 अत्‍याधुनिक बॉर्डर डिफेंस विलेज बसाना शुरू किया है। अक्‍टूबर 2019 में चीन ने सीमा पर गांवों के निर्माण को तेज करने का ऐलान किया था। चीन ने ज्‍यादातर ऐसे गांवों को अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित अपने नागरी और शिगत्‍से इलाकों में बसाना शुरू किया है। चीन के ये गांव अक्‍सर काफी सुदूर हैं और बहुत कम लोग इसमें रहते हैं। ये सभी गांव उन रास्‍तों पर बनाए गए हैं जो कभी तिब्‍बती लोग छिपकर भारत और नेपाल में भागने के लिए किया करते थे। माना जा रहा है कि इन गांवों के जरिए चीन तिब्‍बतियों पर नजर रखना चाह रहा है।
​चीनी गांवों का मकसद दलाई लामा की प्रभाव को खत्‍म करनाचीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी इन गांवों में बसने वाले लोगों को पैसे भी दे रही है। चीन इसके साथ ही इन लोगों को दलाई लामा के प्रभाव को खत्‍म करने के लिए प्रशिक्षण दे रही है। चीन की कोशिश दलाई लामा की ओर से की जाने वाली जासूसी की कोशिशों को रोकना है। चीन नयिनगत्री में बौद्ध भिक्षुओं को प्रशिक्षण दे रहा है। असल में चीन ने इस इलाके में काफी सैन्‍य जमावड़ा कर रखा है और इस इलाके की जासूसी को रोकने के लिए सीमा पर गांव बसा रहा है। सीमा के बेहद करीब बनाए जा रहे कुल 427 गांवों को ‘फर्स्‍ट लाइन’ नाम दिया है। इसी तरह से अन्‍य 201 गांवों को ‘सेकंड लाइन’ नाम दिया गया है। इन इलाकों में रहे त‍िब्‍बती मूल के लोगों जबरन दूसरी जगह पर ले जाया जा रहा है और उनकी चीन समर्थक लोगों को इन गांवों में बसाया जा रहा है। चीन का कहना है कि ये गांव कभी न खत्‍म किए जाने वाले किले की तरह से होंगे।
​जानें, चीन के गांव पर भारत सरकार ने क्‍या दिया जवाबअरुणाचल प्रदेश में चीन के एक गांव बनाने की खबरों पर सतर्कता पूर्वक प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने सोमवार को कहा कि वह देश की सुरक्षा पर असर डालने वाले समस्त घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखता है। साथ ही अपनी संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने अपने नागरिकों की आजीविका को उन्नत बनाने के लिए सड़कों और पुलों समेत सीमा पर इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के निर्माण को तेज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘हमने चीन के भारत के साथ लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्माण कार्य करने की हालिया खबरें देखी हैं। चीन ने पिछले कई वर्षों में ऐसी अवसंरचना निर्माण गतिविधियां संचालित की हैं।’ उसने कहा, ‘हमारी सरकार ने भी जवाब में सड़कों, पुलों आदि के निर्माण समेत सीमा पर बुनियादी संरचना का निर्माण तेज कर दिया है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाली स्थानीय आबादी को अति आवश्यक संपर्क सुविधा मिली है।’ भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है, वहीं भारत इस दावे को खारिज करता रहा है। भारत और चीन के बीच पिछले करीब आठ महीने से पूर्वी लद्दाख में सीमा मुद्दे को लेकर गतिरोध बना हुआ है।