सैनिक स्कूल के इस छात्र की बहादुरी को सलाम, जान देकर बचाई 3 बच्चों की जिंदगी, सेना ने भी किया सैल्यूट

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प्रणय राज, नालंदा
बिहार के नालंदा (Nalanda) में एक सैनिक स्कूल छात्र (Army School) ने अपनी जान देकर अपनी तीन बच्चों की जान बचा ली। मामला पिछले महीने दिसंबर का है, जब रहुई थाने के पेसौर गांव का था जब खाना बनाने के दौरान एक घर में आग लग गई। इसमें दो लड़कियों समेत तीन बच्चे फंस गए। जानकारी के मुताबिक, उन्हें बचाने के लिए 15 वर्षीय अमित राज (Army School Student Amit Raj) ने तुरंत छलांग लगा दी। अपनी जान पर खेलकर अमित ने दो लड़कियों समेत तीन बच्चों को बचा लिया। हालांकि, इस दौरान अमित बुरी तरह झुलस गया।

नालंदा के रहने वाले थे 15 वर्षीय अमितपरिजनों के मुताबिक, अमित को तुरंत ही बिहारशरीफ रेफर किया गया। जहां स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए पटना भेज दिया गया। सैनिक स्कूल के सहयोग से एयर एंबुलेंस के जरिए दिल्ली सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, बाद में अमित अपनी जिंदगी की जंग हार गया। भले ही 15 वर्षीय अमित अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन अपनी जान देकर भी उन्होंने तीन जिंदगियां बचा लीं। उनकी बहादुरी की चर्चा हर ओर है।

ने भी ट्वीट कर बहादुरी को किया सैल्यूटभारतीय सेना ने भी ट्वीट करके अमित की बहादुरी को सैल्यूट किया है। ट्वीट में लिखा, ’15 वर्षीय कैडेट अमित राज ने 3 बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उनका ये बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा, भारतीय सेना इस बहादुर के बलिदान को सैल्यूट करता है।’ वहीं अमित के बहादुरी की चर्चा सोशल मीडिया पर भी लगातार जारी है।

पुरुलिया बंगाल के छात्र थे अमित राज, परिजनों ने की ये मांगअमित राज सैनिक स्कूल पुरुलिया बंगाल के छात्र थे। जिस समय ये घटनाक्रम हुआ वह सुबह में टहलने जा रहे थे। अमित राज के माता पिता जहां बेटे के मौत से दुखी हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें इस बात का गर्व भी हैं कि हमारा बेटा सैनिक का स्कूल का छात्र था। उसने एक सैनिक की तरह वीरता का परिचय देते हुए अपनी जान पर खेलकर बच्चियों की जिंदगी को बचाया है। उन्होंने कहा कि हमारे बेटे को भी सरकार वीरता पुरस्कार से नवाजे।

घर की माली हालत को देखकर यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि अमित राज के माता-पिता निहायत ही गरीब हैं। अमित की बहन राखी कुमारी ने कहा के हम सबको अपने भाई पर नाज है जिसने अपनी जान की बाजी लगाकर जिंदगियां बचाई है। हमारे भाई के प्रति अगर कोई मदद ही करना चाहें तो उसे शौर्य का पुरस्कार दिया जाए। हमें किसी प्रकार के आर्थिक मदद की आवश्यकता नहीं है।