‘हलाल मीट’ पर कैसा विवाद, ओवैसी की पार्टी बोली- मुसलमान गोश्त खाने से करेंगे परहेज

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हैदराबाद
रेड मीट मैन्युअल से हलाल (What is Halal and Haram) शब्द हटाने का निर्णय लिया गया है। केंद्र की के इस निर्णय के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। की ओर से कहा गया है कि मुस्लिम देशों से लेकर सभी देशों में इसका असर होगा। जहां-जहां पर मुसलमान हैं। वो इस गोश्त को खाने से परहेज करेंगे। एक्सपोर्ट का बिजनस इससे डैमेज होगा। व्यापारियों को बड़े पैमाने पर नुकसान होगा।

रेड मीट मैन्युअल से हलाल शब्द हटाने को लेकर एग्रीकल्चर ऐंड प्रोसेस्ड एक्सपोर्ट डिवेलपमेंट अथॉरिटी ने दिशानिर्देश जारी कर दिया है। दरअसल, हिंदू राइट विंग समूह और सिख संगठन हलाल सर्टिफिकेशन के खिलाफ ऑनलाइन अभियान चला रहे थे।

इंपोर्टर की जरूरत के हिसाब से फैसला
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले APEDA एग्री एक्सपोर्ट की निगरानी करता है। पहले रेड मीट मैन्युल में इस्लामी देशों की जरूरतों के देखते हुए यह लिखा होता था कि जानवरों को हलाल प्रक्रिया के तहत जबह (मारा) किया गया है। APEDA ने यह भी साफ किया है भारत सरकार की तरफ से के लिए कोई शर्त नहीं रखी गई है। इसमें कहा गया है कि निर्यात किए जाने वाले देश या इंपोर्टर की जरूरत के लिहाज से फैसला लिया जा सकता है।

हलाल मीट क्या है
हलाल के लिए जानवर की गर्दन को एक तेज धार वाले चाकू से रेता जाता है। इसके बाद सांस वाली नली कटने के कुछ देर में ही जानवर की जान चली जाती है। मुस्लिम मान्यता के मुताबिक हलाल होने वाले जानवर के सामने दूसरा जानवर नहीं ले जाना चाहिए। एक जानवर हलाल करने के बाद ही वहां दूसरा ले जाना चाहिए।

क्या है झटका मीट
कहा जाता है कि झटका का नाम बिजली के झटके से आया है। इसमें जानवर को काटने से पहले इलेक्ट्रिक शॉक देकर उसके दिमाग को सुन्न कर दिया जाता है ताकि वो ज्यादा संघर्ष न करे। उसी अचेत अवस्था में उस पर झटके से धारदार हथियार मारकर सिर धड़ से अलग कर दिया जाता है। हलाल प्रैक्टिस मुस्लिम में जबकि झटका विधि हिंदुओं में प्रचलित है।