क्या बिहार में नीतीश कुमार अपने पुराने दांव से बीजेपी को करने वाले हैं हैरान?

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नीलकमल, पटनासातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण करने वाले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) अक्सर अपने फैसले से राजनीतिक दलों के साथ जनता को चौंकाते रहे हैं। फिर चाहे वह 2013 में नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के खिलाफ मोर्चा खोलने के साथ बीजेपी से अलग होकर अकेले 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ना हो, या फिर लालू यादव की आरजेडी से मिलकर 2015 का विधानसभा चुनाव लड़ना हो। नीतीश कुमार के इन फैसलों से ना सिर्फ राजनीतिक दलों को हैरानी हुई थी बल्कि, बिहार की जनता भी हतप्रभ थी। 2020 में एक बार फिर नीतीश कुमार ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए आरसीपी सिंह (RCP Singh) को जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया।
Nitish Kumar Latest News: बिहार विधानसभा चुनाव 2020 (Bihar Chunav 2020) में जैसे-तैसे एनडीए की सरकार तो बन गई लेकिन, माना जा रहा है कि एनडीए को मिली सीटों से नीतीश कुमार (Nitish Kumar) निराश हैं। विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश कुमार यह कह चुके हैं कि यह उनका अंतिम चुनाव है। अब धीरे-धीरे नीतीश कुमार के उस बात का मतलब भी दिखाई देने लगा है। आरसीपी सिंह (RCP Singh) को जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर नीतीश कुमार ने एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।
नीलकमल, पटना
सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण करने वाले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) अक्सर अपने फैसले से राजनीतिक दलों के साथ जनता को चौंकाते रहे हैं। फिर चाहे वह 2013 में नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के खिलाफ मोर्चा खोलने के साथ बीजेपी से अलग होकर अकेले 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ना हो, या फिर लालू यादव की आरजेडी से मिलकर 2015 का विधानसभा चुनाव लड़ना हो। नीतीश कुमार के इन फैसलों से ना सिर्फ राजनीतिक दलों को हैरानी हुई थी बल्कि, बिहार की जनता भी हतप्रभ थी। 2020 में एक बार फिर नीतीश कुमार ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए आरसीपी सिंह (RCP Singh) को जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया।
नीतीश कुमार कई बार ले चुके हैं चौंकाने वाला फैसलाबिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह कहना कि मैं मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहता था लेकिन बीजेपी ने जोर देकर मुझे ही मुख्यमंत्री बनाया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का भी इसी तरह का एक बयान आया जिसमें यह कहा गया कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे। नीतीश कुमार की छवि एक ऐसे मुख्यमंत्री के तौर पर रही है जो पार्टी की हार के बाद पद त्यागने से नहीं हिचकते। 2014 में लोकसभा चुनाव में 2 सीट मिलने के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और जीतन राम मांझी को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया था।
2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी लालू यादव के आरजेडी के साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी और बिहार में महागठबंधन की सरकार के मुख्यमंत्री बने। लेकिन लालू परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद नीतीश कुमार ने चौंकाने वाला फैसला लेकर महागठबंधन से नाता तोड़ लिया। फिर से वापसी करते हुए बीजेपी के साथ मिलकर एनडीए की सरकार बना ली थी। इसके बाद बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार ने चुनावी सभा को संबोधित करते हुए यह का चौका दिया था कि यह उनका अंतिम चुनाव है। बिहार में एनडीए की सरकार बनी और नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बने लेकिन डेढ़ महीने के भीतर उन्होंने आरसीपी सिंह को जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर सभी राजनीतिक दलों के साथ बिहार की जनता को भी चौंका दिया।
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2021 में भी नीतीश कुमार ले सकते हैं चौंकाने वाला फैसलाराजनीतिक गलियारों में चर्चा अब यह है कि जिस नीतीश कुमार ने 2013 से 2020 तक कई चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। क्या वे 2021 में भी कोई बड़ा फैसला लेकर पूरे देश को चौंका सकते हैं? राजनीतिक गलियारों में यह अनुमान इसलिए भी लगाया जा रहा है कि नीतीश कुमार अब यह खुलकर कहने लगे हैं कि वह खुद बिहार के मुख्यमंत्री बनना नहीं चाहते थे। बीजेपी के जोर जबरदस्ती की वजह से वह मुख्यमंत्री बनने पर मजबूर हुए। 16 नवंबर को मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण करने वाले नीतीश कुमार का 1 महीने के भीतर यह बयान काफी मायने रखता है।
बिहार सरकार का कैबिनेट विस्तार अभी होना बाकी है। इसके पहले ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह बयान राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। वह भी तब जबकि नीतीश कुमार ने जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर आरसीपी सिंह को जिम्मेवारी सौंप दी है। बिहार के राजनीतिक दलों के बीच चर्चा तो यह है कि नीतीश कुमार अब केंद्र की राजनीति में जाना चाहते हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्र की मोदी सरकार के कैबिनेट विस्तार में जेडीयू भी शामिल होगी और नीतीश कुमार कैबिनेट मंत्री के तौर पर मौजूद रहेंगे।
क्या नीतीश कुमार कर रहे हैं केंद्र की राजनीति की तैयारी!बिहार की प्रमुख विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल का मानना है कि नीतीश कुमार अब केंद्र की राजनीति की तैयारी में लग चुके हैं। आरजेडी नेता और प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में जेडीयू के 6 विधायकों का बीजेपी में शामिल होना और इतनी बड़ी घटना के बाद भी जेडीयू का आक्रमक ना होना यह अपने आप में आश्चर्यजनक है। मृत्युंजय तिवारी ने आगे कहा कि अरुणाचल प्रदेश की घटना के बाद नीतीश कुमार ने आरसीपी सिन्हा को जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया। आरजेडी का मानना है कि नीतीश कुमार ने ऐसा इसलिए किया कि आगे और भी इस तरह की कोई घटना घटती है तो नीतीश कुमार पर कोई आरोप ना लगे।
आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी ने यह भी कहा कि बिहार में बीजेपी अब जेडीयू से बड़ी पार्टी है लिहाजा बीजेपी अब अपना मुख्यमंत्री बनाने के फिराक में है और यह बात नीतीश कुमार भी भली-भांति जानते हैं। यही वजह है कि नीतीश कुमार बार-बार कह रहे हैं कि वह मुख्यमंत्री बनना नहीं चाहते थे। नीतीश कुमार अब केंद्र की राजनीति में जाकर एक बार फिर बिहार की जनता को चौंकाने वाले हैं। आरजेडी का मानना है कि नीतीश कुमार अब पूरी तरह से बिहार की सत्ता बीजेपी को सौंपने का मन बना चुके हैं। यानी आने वाले कुछ महीनों में बिहार में बीजेपी का ही मुख्यमंत्री होगा। मृत्युंजय तिवारी ने इसका आधार बताते हुए कहा कि आने वाले समय मे केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार होना है और नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड अब केंद्रीय मंत्रिमंडल दल का हिस्सा होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार होने के कुछ महीनों बाद नीतीश कुमार भी मोदी कैबिनेट के ही हिस्सा बनेंगे।
आरजेडी के अनुमान और सलाह को जेडीयू ने बताया बकवासअरुणाचल प्रदेश के मुद्दे को लेकर बिहार का विपक्ष एक बार फिर से अपने आप को जीवित करने में लगा है। आरजेडी को लगता है कि जेडीयू के 6 विधायक के बीजेपी में शामिल होने के बाद जेडीयू और बीजेपी में एक बार फिर तनातनी की स्थिति बनी हुई है। लिहाजा आरजेडी की ओर से उदय नारायण चौधरी ने नीतीश कुमार को ऑफर भी दे दिया। आरजेडी नेता उदय नारायण चौधरी ने नीतीश कुमार को यह सलाह दी है कि वह तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाएं। खुद केंद्र की राजनीति करें ताकि आने वाले समय में वह प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश कर सके।
नीतीश कुमार को लेकर आरजेडी की सलाह और अनुमान पर जेडीयू नेता का कहना है कि आरजेडी कितना भी प्रयास कर ले अब बिहार की सत्ता में वह कभी नहीं लौट सकते। जेडीयू नेता ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने की बात पर कहा कि अगर सम्मानजनक स्थान मिलता है तो केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने में कोई गुरेज नहीं है। जेडीयू नेता का यह भी कहना है कि जिस प्रकार बिहार में बीजेपी ने संख्या के आधार पर मंत्रिमंडल में शामिल हो रही है, उसी अनुपात में केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी जेडीयू को स्थान मिलना चाहिए। हालांकि जेडीयू नेता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने के आरजेडी के अनुमान को कोरा बकवास करार दिया है।
नीतीश ने अगर बीजेपी को सत्ता सौंपी तो नित्यानंद राय बन सकते हैं मुख्यमंत्रीआरजेडी का दावा यह है कि नीतीश कुमार आने वाले समय में बीजेपी को बिहार की सत्ता सौंप सकते हैं या नहीं आने वाले समय में मुख्यमंत्री बीजेपी का हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो बीजेपी की ओर से नित्यानंद राय को आगे कर मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। बीजेपी के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टीम में शामिल हैं। नित्यानंद राय की छवि साफ-सुथरी और मेहनती कार्यकर्ता के रूप में बनी हुई है। इसके अलावा बीजेपी को यह लगता है कि जब तक बिहार में आरजेडी कमजोर नहीं होगी तब तक बिहार में बीजेपी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती। इसलिए आरजेडी को कमजोर करने के लिए उसके एमवाई (MY = मुस्लिम – यादव) समीकरण को तोड़ना बेहद जरूरी है।
बीजेपी का मानना है कि नित्यानंद राय के मुख्यमंत्री बनने से बिहार के यादव समाज के लोग बीजेपी से जुड़ जाएंगे और इसके बाद मुस्लिम समाज का वोट बैंक भी बिखर जाएगा। ऐसा होने पर ना सिर्फ बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ेगा बल्कि आगामी चुनाव में बीजेपी अपने दम पर सरकार बनाने में सक्षम होगी। बता दें कि वर्तमान समय में बिहार बीजेपी के कार्यकर्ता में भी नित्यानंद राय को मुख्यमंत्री बनाने को लेकर सहमति बनती जा रही है। इसके अलावा बिहार विधानसभा चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर संजय जयसवाल और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। जिसकी वजह से एनडीए की वापसी बिहार में संभव हो सकी।