कोरोना इफेक्टः भारत और रूस के बीच इस बार नहीं होगा वार्षिक शिखर सम्मेलन

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नई दिल्ली
कोरोना महामारी से पूरी दुनिया त्रस्त है। इसका असर भारत और रूस के बीच होने वाले सालाना शिखर बैठक पर भी पड़ा है। करीब दो दशकों में यह पहला मौका होगा जब भारत और रूस के बीच होने वाली वार्षिक शिखर बैठक का आयोजन नहीं किया जाएगा। भारत और रूस दोनों ने बुधवार को बयान जारी करके कहा कि ऐसा कोविड-19 महामारी की वजह से हो रहा है। अन्य कोई भी अटकलें गलत और गुमराह करने वाली हैं।

दोनों मित्र देशों की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब मीडिया में ऐसी रिपोर्ट सामने आई थी कि भारत और रूस के बीच वार्षिक शिखर बैठक इसलिए आयोजित नहीं हुई क्योंकि मॉस्को को क्वाड गठबंधन में भारत के शामिल होने को लेकर आपत्ति थी। आपको बता दें कि चार देशों के गठबंधन क्वाड में भारत, अमेरिका, रूस और आस्ट्रेलिया शामिल हैं।

विदेश मंत्रालय ने साफ की स्थिति
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन ना होने को लेकर कोविड-19 महामारी का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह दोनों सरकारों के बीच आपसी सहमति से लिया गया फैसला है। कोई भी अन्य प्रतिरूपण गलत और भ्रामक है। महत्वपूर्ण संबंधों में झूठी स्टोरी चलाना खासकर गैर-जिम्मेदाराना भी है।

रूसी राजदूत ने भी किया मीडिया रिपोर्ट का खंडन
भारत में रूस के राजदूत निकोल कुदशेव ने भी ऐसी खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा, ‘मैं इसे वास्तविकता से दूर पाता हूं। भारत और रूस के बीच विशेष गठजोड़ कोविड-19 के बावजूद भी अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है।’ उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन की नई तारीखों के बारे में हम भारतीय मित्रों के साथ सम्पर्क में हैं जो महामारी से जुड़े कारणों से टाल दिया गया। हमें विश्वास है कि निकट भविष्य में यह आयोजित होगी।

सम्मेलन स्थगित होने पर राहुल गांधी ने उठाए थे सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत और रूस के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन स्थगित होने को लेकर मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए सवाल उठाया था। उन्होंने ट्वीट किया था, ‘रूस, भारत का एक महत्वपूर्ण दोस्त है। पारंपरिक संबंध को नुकसान हमारी अदूरदर्शिता है और यह भविष्य के लिए घातक होगा।’

एक मीडिया रिपोर्ट पर बनी ये पशोपेश की स्थिति
दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि दो दशक में ऐसा पहली बार है जब भारत और रूस के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन नहीं हो रहा है। ऐसा तब हुआ जब नई दिल्ली के इंडो-पैसिफिक इनिशिएटिव क्वाड जॉइन करने और अमेरिका की तरफ झुकाव को लेकर मॉस्को ने गंभीर आपत्ति दर्ज की है। इसी के बाद भारत और रूस की तरफ से बयान जारी करके स्थिति स्पष्ट की गई है।