जम्मू-कश्मीर डीडीसी इलेक्शनः वोट की चोट के जरिए कश्मीरी आवाम ने दिया बड़ा मेसेज

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श्रीनगर
जम्मू-कश्मीर में 8 चरणों में हुए जिला विकास परिषद चुनाव के लिए मंगलवार को मतगणना हुई। नतीजों ने गुपकार गठबंधन और बीजेपी दोनों को राहत दिया है। एक तरफ जहां गुपकार गठबंधन पूरे चुनाव में सबसे बड़े गठबंधन के तौर पर सामने आया है तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी भी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर में पहली बार हुए इस चुनाव ने कई अहम संदेश दिए हैं।

वोट की चोट से पाकिस्तान और आतंक को करारा जवाब
जम्मू कश्मीर जिला विकास परिषद चुनाव के दौरान कई ऐसे मौके आए जब अप्रत्यक्ष रूप से घाटी में पाकिस्तान ने अशांति फैलाने की कोशिश की। पाकिस्तान की ओर से चुनाव में बाधा डालने की कोशिश की गई, हिंसा को भड़काने का प्रयास किया गया, आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश भी हुई, लेकिन जम्मू कश्मीर की जनता ने यह साफ कर दिया कि हम पाकिस्तान को उसके मंसूबों में कभी कामयाब नहीं होने देंगे।

विकास हर किसी की प्राथमिकता
केंद्र सरकार ने इसी साल जम्मू-कश्मीर में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की व्यवस्था को लागू किया था जिसके बाद कश्मीरी आवाम में भी विकास को लेकर एक नई उम्मीद जगी थी। अपनी इसी उम्मीद को पूरा करने के इरादे से यहां की जनता ने लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान खराब मौसम, कड़ाके की ठंड भी उनका हौसला नहीं डिगा पाई। भयंकर सर्दी में भी लोगों ने लाइन में लगकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

लोकतंत्र से बढ़कर कुछ भी नहीं
5 अगस्त 2019 को जब जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35ए को समाप्त किया गया था, उसके बाद से ही केंद्र की मोदी सरकार कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियों समेत पूरे विपक्ष के निशाने पर है। शुरुआत में तो वहां के सियासी दलों ने लोकतंत्र के इस पर्व में हिस्सा लेने से साफ मना कर दिया था, लेकिन बात जब राजनीतिक अस्तित्व की आई तो इन्हीं पार्टियों ने यूटर्न लेकर न सिर्फ चुनाव लड़ा बल्कि बीजेपी के खिलाफ गुपकार गठबंधन बनाया। गौरतलब है कि डीडीसी के चुनाव में गुपकार गठबंधन को सबसे ज्यादा सीटों पर जीत मिली है।

कश्मीर घाटी में बीजेपी को मिल रही मान्यता
डीडीसी के इस चुनाव में बीजेपी के लिए जो सबसे खास बात रही वह यह कि उसके पहली बार घाटी में कमल खिलाया है। अबतक उसके तीन प्रत्याशियों ने कश्मीर डिविजन में जीत का परचम लहराया है। कश्मीर हमेशा से बीजेपी के कोर अजेंडे में रहा है और घाटी में उसकी जीत इस बात की ओर इशारा करती है कि देर से ही सही लेकिन बीजेपी यहां लोगों का दिल जीतने में कामयाब हो रही है।