India-China: 7 महीने बाद अब खत्म हो सकता है गतिरोध, विदेश मंत्रालय ने कहा- बातचीत के बाद पीछे हट सकती हैं दोनों देशों की सेनाएं

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नयी दिल्ली
भारत और चीन के बीच लंबे वक्त से तनाव की स्थिति बनी हुई है। दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर की बातचीत भी कई दौर की हो चुकी है। कड़कड़ाती ठंड में भी दोनों देशों के जवान सरहद पर आमने-सामने डटे हुए हैं। अब जाकर भारत ने बृहस्पतिवार को उम्मीद जतायी कि चीन के साथ आगे बातचीत से दोनों पक्षों को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सभी संघर्ष वाले इलाकों से पूर्ण रूप से पीछे हटने के लिये परस्पर रूप से स्वीकार्य समझौते पर पहुंचने में मदद मिलेगी।

दोनों देशों के बीच संपर्कविदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने प्रेस वार्ता में बताया कि दोनों पक्ष राजनयिक एवं सैन्य माध्यमों के जरिये सम्पर्क बनाये हुए हैं और इन चर्चाओं के माध्यम से दोनों पक्षों को एक दूसरे के रूख के बारे में समझ बढ़ाने में मदद मिली है। शंघाई में भारतीय वाणिज्यदूतावास ने चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी के कम से कम एक सदस्य को नियुक्त किये जाने की रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह इस सूचना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने की स्थिति में नहीं हैं।

चीनी दूतावास ने आरोपों को नकाराउन्होंने कहा, ‘हमने इस संबंध में मीडिया रिपोर्ट को देखा है। हम इस बात की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने की स्थिति में नहीं हैं।’ श्रीवास्तव ने कहा कि कुछ देशों में स्थानीय कर्मचारियों की नियुक्ति के लिये स्थानीय प्रशासन की अनुमति की जरूरत होती है, हालांकि हमारे सभी मिशन यह सुनिश्चित करते हैं कि इस संबंध में सभी सुरक्षा ऐहतियात बरते जाएं। इस संबंध में मीडिया के सवालों पर चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि यह आरोप आधारहीन हैं।

7 महीने से जारी है गतिरोधसात महीने से जारी सीमा गतिरोध को लेकर भारत-चीन सैन्य एवं राजनयिक वार्ता के अगले दौरान के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सीधे कोई जवाब नहीं दिया हालांकि उन्होंने कहा कि भारत उम्मीद करता है कि आगे बातचीत से पूर्वी लद्दाख में सैनिकों के पूरी तरह पीछे हटने के लिये समझौते तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

भीषण ठंड में भी तैनात हैं जवानश्रीवास्तव ने कहा, ‘हमारी यह उम्मीद है कि आगे बातचीत से दोनों पक्षों को पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सभी संघर्ष वाले इलाकों में पूर्ण रूप से पीछे हटना सुनिश्चित करने के लिये परस्पर रूप से स्वीकार्य समझौते पर पहुंचने एवं जल्द से जल्द शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।’ गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में शून्य से नीचे तापमान वाले पूर्वी लद्दाख के पर्वतीय क्षेत्र में करीब 50 हजार भारतीय सैनिक पूरी तरह से तैयार स्थिति में तैनात हैं । दोनों देशों के बीच गतिरोध को समाप्त करने को लेकर बातचीत का अभी कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है ।