कोरोना वैक्सीन लगने पर साइड इफेक्ट का खतरा? केंद्र का राज्यों को निर्देश- तैयार रहें

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नई दिल्लीएक साल के भीतर ही कोरोना की वैक्सीन अपने देश में भी तैयार होने जा रही है। ऐसे में कई तरह की आशंकाएं जन्म ले रही हैं। मंगलवार को सरकार की ओर से भी इस पर स्पष्ट किया गया कि प्रतिकूल प्रभाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कोरोना वैक्सीनेशन के बाद उसके प्रतिकूल प्रभावों और घटनाओं के सामने आने को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह के प्रतिकूल प्रभाव मुख्य रूप से टीकाकरण के बाद बच्चों और गर्भवती महिलाओं में देखे गए हैं। ऐसे में कोविड-19 टीकाकरण शुरू करने बाद प्रतिकूल घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इसी दौरान, नीति आयोग ने बताया कि इसी हफ्ते ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) ने कुछ और वैक्सीन कैंडिडेट्स के क्लीनिकल ट्रायल्स की मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि अभी छह कैंडिडेट्स का ट्रायल चल रहा है। उन्होंने बताया कि जिनोआ कंपनी ने भारत सरकार की रिसर्च एजेंसी डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नॉलीज के साथ एक वैक्सीन विकसित किया है। उधर, सरकार ने विभिन्न विदेशी कंपनियों से भी कोरोना वैक्सीन खरीदने की डील कर ली है।

टीकाकरण अभियान शुरू होने से पहले बड़ा खुलासा
यानी, देश में जल्द ही कोविड-19 महामारी के खिलाफ देशव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू होने वाला है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के एक बयान ने यह आशंका पैदा कर दी है कि इस वैक्सीन को लेकर लोगों में झिझक देखने को भी मिल सकती है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि जब बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया जाता है तो कुछ लोगों में उल्टा असर भी देखने को मिल जाता है।

ऑनलाइन पोल के नतीजे का क्या संकेत
उधर, लोकलसर्कल्स के ऑनलाइन पोल में भाग लेने वाले 60% लोगों ने जो जवाब दिया, उससे यह आशंका गहरी हो जाती है। पोल में भाग लेने वाले 25,000 में से 15,000 लोगों ने कहा कि उन्हें वैक्सीन लगवाने की कोई जल्दी नहीं है।

‘वैक्सीन से नुकसान की आशंका खारिज नहीं की जा सकती’
बहरहाल, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा, “टीकाकरण के बाद कुछ गड़बड़ियां सामने आना एक चिंताजनक विषय है। जब हम व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम चलाते हैं जो दशकों से चला आ रहा है, तो टीका लगाने के बाद बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुछ उल्टे प्रभाव देखने को मिल जाते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “इसलिए हम कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण शुरू होने पर कुछ विपरीत असर की आशंका को खारिज नहीं कर सकते। जिन देशों में टीकाकरण शुरू हो चुका है, खासकर यूके में, वहां पहले दिन ही गड़बड़ियां सामने आ गईं। इसलिए, जरूरी है कि राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इस लिहाज से भी तैयार रहें।”

टीकाकरण अभियान की तैयारी जोरों पर
उन्होंने कोविड वैक्सीन के भंडारण और वितरण की व्यवस्था की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “29 हजार कोड चेन पॉइंट्स, 240 चलते-फिरते कूलर, 70 चलंत फ्रीजर, बर्फ वाले 45 हजार रेफ्रिजरेटर, 41 हजार डीप फ्रीजर और 300 सोलर रेफ्रिजरेटर का उपयोग होगा। ये सभी उपकरण सरकार के पास पहुंच गए हैं।” उन्होंने कहा कि मेडिकल ऑफिसर्स, वैक्सीनेटर्स, कोल्ड चेन हैंडलर्स, सुपरवाइजर, डाटा मैनेजर्स और आशा को-ऑर्डिनेटर्स का ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार हो गया है। फिजिकल और वर्चुअल ट्रेनिंग शुरू हो गई है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स के प्रशिक्षण भी पूरे हो गए हैं।

ट्रायल में शामिल अनिल विज की हालत अच्छी
स्वास्थ्य सचिव के इस बयान के बीच वैक्सीन को लेकर एक अच्छी खबर भी आई है। हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष के मुताबिक वैक्सीन ट्रायल में शामिल होने वाले प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की हालत अच्छी है और उन्हें दवाइयां दी जा रही हैं।

इन पांच राज्यों में मृत्यु दर फिलहाल ज्यादा
देश में कोरोना मामलों की संख्या 94 लाख से अधिक हो गई है। एक्टिव केस लगातार घट रहे हैं और उनकी संख्या वर्तमान में 3.40 लाख के लगभग है। अभी तक देश में 15 करोड़ 55 लाख से भी अधिक टेस्ट हो गए हैं। पॉजिटिविटी रेट में भी गिरावट है। केरल, महाराष्ट्र, राजस्थान, प. बंगाल और दिल्ली में वर्तमान में अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे अधिक प्रतिदिन औसतन पॉजिटिव केस दर्ज किए जा रहे हैं। दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, प. बंगाल और पंजाब में अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे अधिक औसतन प्रतिदिन नई मृत्यु दर है।