Exclusive: कूड़े के ढेर पर खड़ी है राजधानी लखनऊ, NBT ऑनलाइन के कैमरे से देखिए नवाबों के शहर की ‘बदहाल कहानी’

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हेमेन्द्र त्रिपाठी, लखनऊकेंद्र सरकार के वाले सपने को सभी राज्य सरकारें अपने-अपने राज्यों में लगभग पूरी तरह से लागू कर चुकी थीं। कहीं, राजनेता झाड़ू पकड़ कर सफाई करते हुए तस्वीरों ने नजर आते थे तो कहीं कार्यकर्ता अपने क्षेत्र की साफ-सुथरी तस्वीर का प्रमाणपत्र देते नजर आते थे। सरकारी दावों की जमीनी हकीकत का जायजा लेने जब एनबीटी ऑनलाइन की टीम उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सड़कों पर उतरी तो स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ी हुई जो तस्वीरें सामने आईं वे लखनऊ के नगर निगम द्वारा रोजाना चलाए जा रहे पर बड़ा सवाल खड़ा करती हैं।

नगर आयुक्त ने हवा में दी 15 दिन में कार्रवाई के निर्देश
लखनऊ के नगर आयुक्त ने नवम्बर माह के अंत में नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को खाली प्लॉट में कूड़ा मिलने पर प्लॉट स्वामियों के ऊपर 50,000 के जुर्माने की बात कही थी। नगर आयुक्त अजय कुमार द्विवेदी ने सभी जोनल अधिकारियों को निर्देश देते हुए 15 दिनों में खाली प्लॉटों का कर निर्धारण करने की समय अवधि दी। इसके बावजूद राजधानी के सैकड़ों प्लॉटों में आज भी कूड़ा जमा हुआ है। ऐसे में नगर आयुक्त के अनुसार दी गई 15 दिन की अवधि में आलाधिकारियों ने क्या काम किया? इस बात का जायजा लेने न लखनऊ के नगर आयुक्त खुद सड़कों पर आए और न ही स्वच्छता के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार सड़कों पर नजर आई।

घर-घर से कूड़ा उठाने के बाद भी सड़कों पर नजर आ रहा कचरा
स्वच्छ भारत मिशन के तरह यूपी सरकार ने घर-घर से कूड़ा उठाने पर जोर दिया, जिसके बाद शहर के हर छोटे-बड़े मोहल्लों और कॉलोनियों के भीतर साफ-सफाई की स्वच्छता से निकलने वाली एक किरण दिखने लगी। लेकिन, उन्हीं कॉलोनियों के बाहर सड़क किनारे भारी मात्रा में दिखने वाले कचरे ने लखनऊ नगर निगम की पोल खोलकर रख दी। अब सवाल ये है कि यदि नगर निगम घरों से कूड़ा उठाकर स्वच्छता की मिसाल पेश कर रहा है तो सड़कों पर खुले में पड़े कचरे से होने वाले प्रदूषण को क्यों नजरअंदाज करता जा रहा है।

पिछड़े क्षेत्रों के लोग बोले- ‘ महीने में एक बार आती है कूड़ा उठाने वाली गाड़ी’
घर-घर से कूड़ा उठानेवाले वाहनों की गति कितनी दूर तक सीमित है इस बात का जायजा लेने जब लखनऊ के छोटे-छोटे क्षेत्रों में एनबीटी ऑनलाइन की टीम पहुंची तो वहां के निवासियों ने स्वच्छता के ठेकेदारों से जुड़ा एक अलग किस्म का सवाल सामने लाकर खड़ा कर दिया। उन इलाकों में फैलने वाली गंदगी और उससे होने वाली बीमारियों की एक असल वजह सामने आई। लोगों ने बताया, ‘महीने में एक बार ही गाड़ी आती है, जो थोड़ा बहुत कचरा लेकर चली जाती है’। अब ऐसे में लखनऊ नगर निगम से सवाल खड़े होते हैं कि आखिर इलाकों में कूड़ा एक जगह क्यों जमा नहीं होगा? और किस प्रकार के स्वच्छता अभियान का दावा लखनऊ नगर निगम करता है?

एक पार्षद बोले- ‘नहीं सुनते नगर निगम के अधिकारी’ तो दूसरे ने कहा- ‘सफाई कराना मेरा काम नहीं’
लखनऊ नगर निगम के स्वच्छता अभियान में दिख रही सेंध के चलते जब दो वॉर्डों के पार्षद से बात की गई तो एक नए जहां नगर निगम के अधिकारियों की ओर से चलाये जा रहे अभी पर से पर्दा उठाया तो दूसरे ने मेरी जिम्मेदारी नहीं है कहकर मामले से मुंह मोड़ लिया। लखनऊ के मनकामेश्वर वॉर्ड में नजर आ रहे कूड़े पर वहां के पार्षद रणजीत सिंह ने नगर निगम के अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया। साथ ही यह भी कहा कि दर्जनों बार नगर निगम को सूचित किया जा चुका है लेकिन जगह-जगह इकट्ठा हुए कचरे से फैलने वाले प्रदूषण को हर अधिकारी नजरअंदाज कर रहा है।

वहीं, फैजुल्लागंज सेकंड में पुरवा क्षेत्र स्थित सोपान एनक्लेव के पीछे भारी मात्रा में फैले कचरे पर जब स्थानीय पार्षद जगलाल यादव से बात की गई तो उन्होंने कहा, ‘क्षेत्र की गंदगी से जुड़ी समस्या को लेकर कोई मेरे पास आएगा तो काम कराने की कोशिश की जाएगी, लेकिन मैं किसी के पास चल कर नहीं जाऊंगा।’