शनिवार से और तेज होगा किसान आंदोलन, जानें आपको क्या हो सकती हैं परेशानियां

0
48

नई दिल्ली
दिल्ली बॉर्डर और अन्य जगहों पर प्रदर्शन कर रहे किसान अब अपने आंदोलन को तेज करने जा रहे हैं। इसे लेकर रणनीति तय कर ली गई है। गाजीपुर बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने भी अपनी रणनीति साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि 12 दिसंबर और 14 दिसंबर के विरोध प्रदर्शन के लिए रणनीति बनाई गई है। वहीं, बीकेयू के एक अन्य नेता गुरविंदर सिंह ने भी कहा कि जब तक तीनों कृषि कानून वापस नहीं होंगे किसानों का यह आंदोलन बढ़ता रहेगा। उन्होंने कहा कि आगे आंदोलन और तेज करने की तैयारी जोरों पर चल रही है। आइए समझते हैं कि शनिवार से आपको किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है…

12 दिसंबर और 14 दिसंबर को क्या होगा
किसानों ने कृषि कानून के खिलाफ सरकार को साफ कर दिया है कि जब तक केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द नहीं करेगी, तब तक वे वापस नहीं जाएंगे। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, ’12 दिसंबर को देशभर के टोल प्लाजा पर हम अपना विरोध जताएंगे। ये विरोध केंद्र सरकार और मल्टीनैशनल कंपनियों के खिलाफ भी होगा। हमारे कार्यकर्ता विभिन्न जगहों पर प्रदर्शन करेंगे।’

टिकैत ने बताया, ’14 दिसंबर को देशभर के सभी जिलाधिकारियों को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें इन कानूनों को वापस लेने की मांग की जाएगी।’ उन्होंने कहा, ‘जब तक केंद्र सरकार ये कानून वापस नहीं ले लेती तब तक हर रोज 11 बजे किसान क्रांति मार्च निकालेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे।’ इसके अलावा गाजीपुर बॉर्डर पर बैनर, पोस्टर भी लगाए जाएंगे।

जयपुर-दिल्ली एक्सप्रेसवे जाम करने की तैयारी
ऑल इंडिया किसान सभा के पंजाब में जनरल सेक्रेटरी मेजर सिंह पुनावाल ने कहा, ”हमारा अगला कार्यक्रम 12 दिसंबर से पहले जयपुर-दिल्ली एक्सप्रेसवे को जाम करना है और 14 दिसंबर को देशभर में जिला स्तर पर डीसी के दफ्तरों के सामने मोर्चे निकाल कर धरना-प्रदर्शन करना है। बीजेपी के दफ्तरों के आगे भी धरना दिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि पंजाब की तरह देशभर में टोल फ्री किया जाएगा और रिलायंस के पेट्रोल पंप को बंद किया जाएगा।

इन बयानों से स्पष्ट है कि…
1. देशभर में 12 दिसंबर को नौ बजे से लेकर शाम तक सारे टोल फ्री करवाने की जद्दोजहद होगी।

2. रिलायंस के पेट्रोल पंप भी बंद किए जाएंगे।

3. भारतीय किसान यूनियन के प्रभाव वाले इलाकों में कार्यकर्ता विभिन्न जगहों पर प्रदर्शन करेंगे।

4. मल्टीनैशनल कंपनियों के खिलाफ भी प्रदर्शन के कारण कुछ मॉल्स भी प्रभावित रह सकते हैं।

5. 14 दिसंबर को देशभर के सभी जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन का कार्यक्रम है।

6. मांग माने जाने तक हर रोज 11 बजे किसान क्रांति मार्च निकालेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

कहीं अफवाहों में आकर अराजक न हो जाएं प्रदर्शनकारी
उधर, हरियाणा के किसान नेता और बीकेयू के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी की तरफ से जताई गई चिंता ने कुछ और आशंकाएं पैदा कर दी हैं। चढ़ूनी ने कहा, ”हमें शिकायतें मिली हैं कि कुछ लोग अपनी मर्जी से रिलायंस के टावर काटने, रिलायंस के मॉल बंद करने या वहां कुछ और करने के लिए अफवाहें फैला रहे हैं।” प्रदर्शनकारियों से इन अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील करते हुए उन्होंने कहा, ”मेरी विनती है कि यह आंदोलन टूट न जाय और इसका हश्र जाट आंदोलन की तरह न हो, इसलिए ऐसा कोई कदम न उठाएं।”

किसान नेता गुरनाम सिंह की चेतावनी
उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा करवाना चाहती है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे उतना ही काम करें जितना कमिटी द्वारा कहा जाए। चढ़ूनी ने प्रदर्शनकारियों से सिर्फ कमिटी द्वारा दिए गए आदेशों और निदेर्शों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा, ”आंदोलन के दौरान जो भी तोड़फोड़ करेगा या आगजनी करेगा वह हमारा आदमी नहीं होगा, उसको पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा।” चढ़ूनी ने कहा, ”हमारी पंचायत में आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए तीन फैसले लिए गए हैं।” ये फैसले हैं: 1. रिलायंस की सीम पोर्ट करवाना है 2. देशभर में 12 दिसंबर को नौ बजे से लेकर शाम तक सारे टोल फ्री करवाना है और रोडजाम नहीं करना है। 3. देशभर में 14 दिसंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर धरना देना है।

तीनों कृषि कानून रद्द करने की मांग पर अड़े किसान
बता दें कि किसान संगठन केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानून, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 को निरस्त करवाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए वो 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 14 दिनों से डटे हुए हैं।

सरकार के प्रस्ताव खारिज कर आंदोलन उग्र करने जा रहे किसान
दरअसल, केंद्र सरकार ने किसान नेताओं को नये कृषि कानूनों के साथ-साथ, एमएसपी पर फसलों की खरीद जारी रखने से लेकर पराली से जुड़े अध्यादेश और बिजली संशोधन विधेयक 2020 के आने से बिजली सब्सिडी को लेकर किसानों की आशंकाओं का समाधान करने के लिए बुधवार को प्रस्तावों का एक मसौदा भेजा था, जिसे किसान यूनियनों ने सिरे से खारिज करते हुए आंदोलन आगे और तेज करने का ऐलान कर दिया। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सभी फसलों की खरीद की गारंटी भी चाहते हैं। इसके अलावा, उनकी मांगों में पराली दहन से जुड़े अध्यादेश में कठोर दंड और जुर्माने के प्रावधानों को समाप्त करने और बिजली (संशोधन) विधेयक को वापस लेने की मांग भी शामिल है।

(आईएएनएस और भाषा के इनपुट के साथ)