‘किसान आंदोलन में लेफ्ट वाले हावी’ मंत्रियों के बयान और खुफिया रिपोर्ट का क्या इशारा

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किसानों के इस अड़ियल रवैये से केंद्र सरकार के माथे पर बल आना स्वाभाविक है। सरकार के कई मंत्रियों को लग रहा है कि किसान संगठनों के इतने कड़े रुख के पीछे किसी-न-किसी की साजिश तो जरूर है। उधर, न्यूज चैनल आज तक ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि खुफिया विभाग ने भी सरकार को रिपोर्ट दी है कि किसान आंदोलन हाइजैक हो रहा है। ऐसे में क्या यह आशंका पैदा हो रही है कि प्रदर्शनकारी किसानों के साथ बीच का रास्ता निकल पाने की उम्मीद खत्म होने की स्थिति में सरकार भी अपना रुख बदल सकती है? क्या संभव है कि सरकार ‘कुछ प्रदर्शनकारियों’ के खिलाफ कड़ा ऐक्शन लेने का मन बना ले ताकि ‘देशविरोधी और अराजक तत्वों को स्पेस नहीं मिल सके।’ कुछ प्रमुख केंद्रीय मंत्रियों के बयान पढ़िए और समझिए कि क्या ये बयान किसान आंदोलनकारियों में घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई की भूमिका तैयार कर रहे हैं…
किसानों ने 9 दिसंबर को सरकार की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया और दो टूक अंदाज में कहा कि उन्हें तीनों नए कृषि कानूनों की वापसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।
किसानों के इस अड़ियल रवैये से केंद्र सरकार के माथे पर बल आना स्वाभाविक है। सरकार के कई मंत्रियों को लग रहा है कि किसान संगठनों के इतने कड़े रुख के पीछे किसी-न-किसी की साजिश तो जरूर है। उधर, न्यूज चैनल आज तक ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि खुफिया विभाग ने भी सरकार को रिपोर्ट दी है कि किसान आंदोलन हाइजैक हो रहा है। ऐसे में क्या यह आशंका पैदा हो रही है कि प्रदर्शनकारी किसानों के साथ बीच का रास्ता निकल पाने की उम्मीद खत्म होने की स्थिति में सरकार भी अपना रुख बदल सकती है? क्या संभव है कि सरकार ‘कुछ प्रदर्शनकारियों’ के खिलाफ कड़ा ऐक्शन लेने का मन बना ले ताकि ‘देशविरोधी और अराजक तत्वों को स्पेस नहीं मिल सके।’ कुछ प्रमुख केंद्रीय मंत्रियों के बयान पढ़िए और समझिए कि क्या ये बयान किसान आंदोलनकारियों में घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई की भूमिका तैयार कर रहे हैं…
​शायद टुकड़े-टुकड़े गैंग के कारण सफल नहीं हो रही वार्ता: रविशंकर प्रसादकानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को लगता है कि किसान आंदोलन को हाइजैक किया जा रहा है। उन्होंने आंदोलनकारियों के हाथों में उमर खालिद, शरजील इमाम जैसे लोगों की रिहाई की मांग वाले प्लेकार्ड्स होने के पीछे साजिश की बात कही।
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प्रसाद ने कहा, ‘इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि टुकड़े-टुकड़े गैंग अजेंडे को टेकओवर करने की कोशिश कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि किसान संगठनों के विरोध का फायदा उठाने के लिए उनकी तस्वीरें प्रदर्शित की जा रही हैं। शायद ऐसे तत्वों की मौजूदगी के कारण ही सरकार के साथ बातचीत सफल नहीं हो रही है।
न्यूज चैनल आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के कानून मंत्री ने कहा कि सरकार खुले दिमाग के साथ बातचीत को तैयार है जबकि उधर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही। ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी गई। उन्होंने किसानों से अपने आंदोलन को हाइजैक न होने देने की अपील की। प्रसाद ने इन तत्वों को भारत की संप्रभुता के लिए हानिकारक बताया और कहा कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी लेकिन किसानों के विरोध की पवित्रता बरकरार रहनी चाहिए।
​किसानों के वेष में असामाजिक तत्व: नरेंद्र सिंह तोमरकेंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों के वेष में असामाजिक तत्व किसान आंदोलन का माहौल बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं। उन्होंने किसानों से इनसे बचकर रहने की अपील की। उन्होंने कहा, “किसान भाइयों से आग्रह है कि वो इन असामाजिक तत्वों को प्लैटफॉर्म मुहैया नहीं कराएं।” उन्होंने इस बात पर भी रोष प्रकट किया कि किसान प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न आरोपों में जेल में बंद लोगों की रिहाई की मांग की। उन्होंने कहा, “यह खतरनाक है। किसान संगठनों को इन लोगों से दूर रहना चाहिए। यह मुद्दे को भटकाने का प्रयास है।” उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से भी किसान आंदोलन में असामाजिक तत्वों की घुसपैठ पकड़ने की अपील की। तोमर ने कहा, “मीडिया की निगाह काफी तीक्ष्ण होती है। हम आप पर ही छोड़ देते हैं। अब आप ही पता लगाएं।” इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा कि मीडिया को अपनी स्किल की इस्तेमाल कर यह पता करना चाहिए कि आखिर किसान आंदोलन को कौन से तत्व हाइजैक कर रहे हैं।
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​गोयल ने किया ‘लेफ्ट और माओवाद’ का जिक्रकेंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि कुछ लोग चर्चा में बार-बार बस एक ही मुद्दा उछालते रहे कि कानून रद्द करो और हम कुछ बात नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि एक वर्ग इस आंदोलन में घुस गया है जो लेफ्ट और माओवादी विचारधारा से प्रभावित है और वे नहीं चाहते हैं कि इस समस्या का समाधान हो। वे चाहते हैं कि वार्ता सफल न हो। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई ऐसे मुद्दे, जिस पर शंका की कहीं कोई बात ही नहीं है, उस पर भी कहा कि हम उसे और सुदृढ़ करने के लिए तैयार हैं। कुछ विषयों को लेकर हमने कानून में बदलाव की भी बात की। सरकार ओपेन माइंड से बात कर रही है। हमारा अब भी कहना है कि प्रस्ताव की फिर से स्टडी करें, देशभर के किसानों ने इसका स्वागत किया है पर कुछ लोग इसे सफल नहीं होने देना चाहते।
​देश तोड़ने वालों के हाथों चला गया आंदोलन: जावड़ेकरवहीं, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, “सरकार किसान संगठनों से बातचीत के लिए तैयार है। सरकार ने किसानों की कई मांगें मान ली हैं लेकिन जब बातचीत में उनकी मंशा प्रकट हुई कि शरजील इमाम जैसे लोगों की रिहाई हो। मुझे लगता है कि किसान संगठन की जगह अब आंदोलन देश को तोड़ने वाले हाथों में चला गया है।”
​आंदोलन के पीछे चीन-पाकिस्तान: राव साहब दानवेकेंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे ने बुधवार को दावा किया कि किसानों के विरोध-प्रदर्शनों के पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है। उन्होंने कहा कि अब किसानों को बताया जा रहा है कि नए कानूनों के कारण उन्हें नुकसान होगा। उन्होंने कहा, “जो आंदोलन चल रहा है, वह किसानों का नहीं है। इसके पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है। इस देश में मुसलमानों को पहले भड़काया गया। (उन्हें) क्या कहा गया? एनआरसी आ रहा है, सीएए आ रहा है और छह माह में मुसलमानों को इस देश को छोड़ना होगा। क्या एक भी मुस्लिम ने देश छोड़ा?” केंद्रीय मंत्री ने कहा,” वे प्रयास सफल नहीं हुए और अब किसानों को बताया जा रहा है कि उन्हें नुकसान सहना पड़ेगा। यह दूसरे देशों की साजिश है।” दानवे उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं।
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​आंदोलन पर उग्र वामपंथी नेताओं और वामपंथी उग्रवादियों का प्रभाव: खुफिया विभागसूत्रों की मानें तो खुफिया विभाग ने सरकार को रिपोर्ट दी है जिसमें कहा गया है कि किसान आंदोलन पर अल्ट्रा-लेफ्ट लीडर्स और वामपंथी उग्रवादियों ने कब्जा हो गया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने दावा किया है कि इस बात के विश्वनीय खुफिया सूचनाएं हैं कि उग्र वामपंथी नेता और वामपंथी उग्रवादी संगठन योजना बना रहे हैं कि आने वाले दिनों में किसानों को हिंसा, आगजनी, तोड़-फोड़ के लिए कैसे उकसाया जाए।