प्रायोगिक परीक्षणों के सभी मानकों पर खरी उतरी डीआरडीओ की बनाई सब-मशीनगन

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नई दिल्लीरक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की बनाई गई 5.56×30 एमएम की सब-मशीनगन रक्षा मंत्रालय के प्रायोगिक परीक्षणों (Test Firing of DRDO made Submachine Gun) में सफलतापूर्वक खरी उतरी है। इस बात की घोषणा गुरुवार को की गई। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि परीक्षणों के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद इस सब-मशीनगन को सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

जानें देसी सब-मशीनगन के फीचर्स
बयान में उल्लेख किया गया कि डीआरडीओ द्वारा विकसित 5.56×30 एमएम की संयुक्त रक्षात्मक उपक्रम कार्बाइन (JVPS) गैस संचालित अर्ध-स्वचालित अस्त्र है और इससे एक मिनट में 700 से अधिक गोलियां दागी जा सकती हैं। इसमें कहा गया कि अंतिम चरण का प्रायोगिक परीक्षण सोमवार को किया गया जिसमें सभी जरूरी मानक प्राप्त कर लिए गए। इस कार्बाइन की प्रभावी रेंज 100 मीटर से अधिक की है।

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सेना को मिलेंगीं 72 हजार अमेरिक असॉल्ट राइफलें
ध्यान रहे कि ईस्टर्न लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत-चीन तनाव के बीच सैन्य साजो-सामान जुटाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में रक्षा मंत्रालय ने बीते सितंबर महीने में सेना के लिए 72 हजार और अमेरिकी सिग सॉर असॉल्ट राइफल की खरीद को मंजूरी दी थी। रक्षा अधिग्रहण काउंसिल (DAC) की मीटिंग में सिग सॉर के लिए 780 करोड़ रुपये को मंजूरी दी गई। वहीं, रक्षा मंत्रालय ने नई रक्षा अधिग्रहण पॉलिसी को भी मंजूरी दी है। नई अधिग्रहण पॉलिसी के तहत सेना कई रक्षा उपकरण लीज पर भी ले सकती है। इससे उसे खरीदने में लगने वाला वक्त बचेगा साथ ही कीमत भी कम होगी।

(न्यूज एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)