सुप्रीम कोर्ट पहुंचा रोशनी एक्ट का मामला, दंडात्मक कार्रवाई पर लगी रोक

0
12

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट से कहा है कि वह रोशनी एक्ट को खारिज करने के खिलाफ दाखिल रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई कर 21 दिसंबर तक फैसला दे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में जम्मू कश्मीर एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने मौखिक तौर पर आश्वासान दिया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगा और कहा कि याचिकाकर्ता न तो जमीन कब्जा करने वाले लोग हैं और न ही अनाधिकृत कब्जा करने वाले लोग हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह याचिकाकर्ताओं की उस अपील पर जनवरी के आखिर में सुनवाई करेगा जिसमें 9 अक्टूबर के हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जम्मू कश्मीर एडमिनिस्ट्रेशन पहले ही हाई कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल कर चुकी है और कहा कि अथॉरिटी कोई एक्शन नहीं लेने जा रही है क्योंकि ये लोग आम आदमी हैं न कि जमीन पर कब्जा करने वाले लोग। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्तओं ने सुप्रीम कोर्ट में जो अपील दाखिल की है वह हाई कोर्ट के रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई और फैसले के आड़े नहीं आएगा।

दरअसल जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट ने 9 दिसंबर को रोशनी एक्ट को अवैध, गैर संवैधानिक और टिकने वाला नहीं है। हाई कोर्ट ने कानून के तहत जमीन अावंटन की सीबीआई जांच का भी आदेश दिया था। रोशनी एक्ट 2001 में बनाया गया था। एक्ट बनाए जाने का मकसद ये था कि पावर प्रोजेक्ट के लिए संशाधन जुटाना था और राज्य की जमीन पर जो लोग बसे हैं उन्हें मालिकाना हक ट्रांसफर करना था।

सुप्रीम कोर्ट में विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई हुई और शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी टकराव वाले आदेश को टालने के लिए याचिकाकर्ता पहले हाई कोर्ट जाएंं जहां रिव्यू पिटिशन दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता को पहले हाई कोर्ट अप्रोच करना चाहिए और हाई कोर्ट को पहले सुनवा चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जम्मू कश्मीर एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को कहा है कि तब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से मुकुल रोहतगी पेश हुए और कहा कि हाई कोर्ट ने गलत तरीके से एक्ट को खारिज किया है। रोशनी एक्ट का लाभ पाने वाले लोगों को हाई कोर्ट में पक्ष रखने का मौका नहीं मिला। तब बेंच ने कहा कि आपको पता होना चाहिए कि हाई कोर्ट में रिव्यू पिटिशन पेंडिंग है। हाई कोर्ट ने रिव्यू पिटिशन 21 दिसंबर के लिए लिस्ट कर रखा है और यथास्थिति बनाए रखने को हाई कोर्ट पहले ही कह चुकी है। दो अलग-अलग अपील पर सामानांतर सुनवाई कैसे हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य एडमिनिस्ट्रेशन रिव्यू पिटिशन दाखिल कर चुकी है और जमीन मालिकों को दो कैटगरी में बांटा हुआ है एक अवैध कब्जे वाला और दूसरा असली मालिक। तब रोहतगी ने कहा कि अपील दाखिल करने का मकसद ये है कि कानूनी तौर पर जो मालिक हैं उन्हें जमीन से हटाया न जाए। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा है कि वह रिव्यू पिटिशन की सुनवाई करे और जनवरी के आखिर में लिस्ट करने को कहा है और मेहता से कहा कि तब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।