राजस्थान पंचायत चुनाव: आंदोलन-गुटबाजी कांग्रेस की चुनौतियां, BJP गांव की ‘ सरताज ‘

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जयपुर राजस्थान में पंचायतराज चुनावों और जिला परिषद के चुनावों के मंगलवार को आए परिणाम बेहद रोचक रहे। इसमें जहां दिनभर कांग्रेस आगे रही। वहीं शाम होते- होते बीजेपी ने बढ़त बना ली। उल्लेखनीय है कि राजस्थान के 21 जिलों के शाम तक 3693 पंचायत समिति सदस्यों के घोषित परिणाम में से कांग्रेस ने 1554 सीटों पर विजय हासिल की। वहीं भाजपा ने 1675 सीटे जीत ली। 221 सीटों पर निर्दलीय एवं अन्य ने जीत हासिल की। आपको बता दें कि राजस्थान में जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों के लिए 23, 27 नवंबर, 1 दिसंबर और 5 दिसंबर को मतदान हुआ था। पंचायत समिति प्रधान एवं जिला प्रमुख का चुनाव 10 दिसंबर और उप प्रधान एवं उप प्रमुख के लिए 11 दिसंबर को चुनाव होगा।

यह रहा जिला परिषद का हाल इसी तरह जिला परिषद के चुनावों में भाजपा ने 142 घोषित परिणाम में से भाजपा ने 78 और कांग्रेस ने 62 सीटे जीती। पंचायत और जिला परिषद के चुनावों में भाजपा की बढ़त ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। इससे कांग्रेस पर विपक्षी भाजपा का दबाव बढे़गा। इससे लगता है कि किसान आंदोलन का भी असर नहीं पड़ा। ग्रामीणों ने भाजपा को वोट दिए। हालांकि चुनावों में जीत के बाद भी निर्वाचित प्रतिनिधि खुले में नहीं है और दोनों ही पार्टियां बाडे़बंदी में जुट गई है। जिला प्रमुखों और प्रधान के निर्वाचन के दिन ही अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों को एक साथ लेकर आएगी।

हनुमान बेनीवाल और निर्दलीयों ने भी बिगाड़ा खेल उल्लेखनीय है कि कई स्थानों पर निर्दलीय और हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी की भूमिका रहेगी। वहीं अजमेर जिले की 11 पंचायत समिति में से 9 में भाजपा को बहुमत और कांग्रेस को सिर्फ 2 में ही बढ़त मिली। गौरतलब है कि सचिन पायलट अजमेर से 2014 तक सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री भी रहे थे। अजमेर से रघु शर्मा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री भी है। वर्तमान में कांग्रेस की गुटबाजी के चलते चुनावों पर असर पड़ा। परिणामों से लग रहा है कि कांग्रेस को नुकसान पूरे राजस्थान में उठाना पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सचिन पायलट गुट और गुर्जर समाज की नाराजगी का असर दिखा है। साथ ही सरकार से नाराज संगठन कार्यकर्ताओं ने भी पूरी ताकत नहीं झोंकी। अगर परिणामों में अंत तक भाजपा की बढ़त बनी रही, तो कांग्रेस की परेशानी बढे़गी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भी सचिन पायलट की उपेक्षा करना आसान नहीं रहेगा।