केजरीवाल ने दी एक नए कृषि कानून को मंजूरी, लेकिन अब तीनों कानूनों की वापसी का समर्थन!

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नई दिल्ली
नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन जारी है। इसी बीच इस आंदोलन की आड़ में सियासतदान अपनी राजनैतिक रोटियां भी सेंकने में जुटे हुए हैं। हालांकि आंदोलनरत किसान किसी भी प्रकार से अपने आंदोलन को राजनैतिक शक्ल नहीं बनना देना चाहते हैं। आज सुबह दिल्ली के मुख्यमंत्री () सिंघु बॉर्डर पहुंचे। वहां उन्होंने कहा कि वह यहां मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं बल्कि सेवादार बनकर आए हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर सीएम केजरीवाल को लोग घेरने लगे हैं।

किसानों से मिले सीएम केजरीवालदरअसल, नए कृषि कानून का विरोध हर रोज तेज होता जा रहा है। मंगलवार को किसानों ने भारत बंद का भी आवह्न किया है। इसी बीच सोमवार सुबह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल किसानों से मिलने पहुंचे। केजरीवाल के साथ डेप्युटी सीएम मनीष सिसोदिया भी किसानों को आश्वासन देते दिखे। केजरीवाल ने किसानों से मुलाकात कर वहां की सुविधाओं का जायजा लिया और किसानों से कहा कि उनकी सरकार किसानों की सेवादार है। जबकि कुछ ही दिन पहले केजरीवाल सरकार ने तीन नए कृषि कानून में से एक को दिल्ली में लागू कर दिया था।

दिल्ली में लागू हुआ एक गजटएक दिसंबर को बताया गया था कि दिल्ली सरकार ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों में से एक की अधिसूचना जारी कर दी है जबकि बाकी दो अन्य पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) कानून, 2020 को 23 नवंबर को अधिसूचित किया गया था।

1 दिसंबर को जारी हुई थी सूचनाउन्होंने कहा था , ‘ बाकी दो कानूनों पर दिल्ली सरकार के विकास विभाग द्वारा विचार किया जा रहा है।’ सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने कहा कि अधिसूचना के तहत किसान अपनी फसल मंडी के बाहर सहित कहीं भी बेच सकते हैं। दिल्ली में कई साल पहले से ही फलों और सब्जियों की बिक्री विनियमन मुक्त थी और अब अनाज के लिए भी यह लागू हो गया है। हालांकि, पार्टी ने नए कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की किसानों की मांग का खुले तौर पर समर्थन किया है।

अब इसी बात पर सोशल मीडिया पर बहस हो रही है कि केजरीवाल ने अगर बिल पास कर दिया तो फिर वो किसानों के पास क्यों गए। लोग केजरीवाल पर राजनीति करने का आरोप भी लगा रहे हैं।