देशभर के थानों और सभी जांच एजेंसियों के दफ्तरों में लगेंगे CCTV कैमरे, सुप्रीम कोर्ट का आदेश

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नई दिल्लीदेश भर के थानों में सीसीटीवी लगाने का ने निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि सही भावना से कोर्ट के आदेश को लागू कराया जाए। थाने का एसएचओ तमाम डाटा और सीसीटीवी के रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगा और एसएचओ इस बात को सुनिश्चित करेगा कि सीसीटीवी वर्किंग कंडिशन में रहे। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सीबीआई, ईडी, एनआईए, एनसीबी, डीआरआई, सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन आदि के दफ्तर में भी सीसीटीवी लगाए जाएं।

राज्यों के प्रिंसिपल सेक्रेटरी एक्शन प्लान बताएं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, कैबिनेट सेक्रेटरी या फिर होम सेक्रेटरी हलफनामा दायर कर बताएं कि अदालत के आदेश का पालन के लिए एक्शन प्लान क्या है और टाइम लाइन क्या होगी। अदालत ने इसके लिए छह हफ्ते का वक्त दिया है।

लॉकअप से लेकर थाने के चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी लगाए जाएं
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रोहिंटन एफ नरीमन की अगुवा‌ई वाली बेंच ने कहा कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सुनिस्चित करे कि हर पुलिस थाने में सीसीटीवी लगाए जाएं। और थाने का कोई भी एरिया सीसीटीवी के कवरेज से बाहर न रहे। सभी एंट्री और एग्जिट पर सीसीटीवी की नजर होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि मेन गेट के अलावा सभी लॉकअप में सीसीटीवी होने चाहिए। साथ ही सभी कोरिडोर, लॉबी, रिसेप्सन, इंस्पेक्टर के कमरे, सब इंस्पेक्टर के कमरे, ड्यूटी रूम और थाने के कैंपस भी सीसीटीवी के निगरानी में रहेगा। सीसीटीवी नाइट विजन वाला होना चाहिए और इसमें विडियो और ऑडिटो फूटेज हो। जहां भी देश भर में थाने में नेट और बिजली की उपलब्धता नहीं है वहां बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की होगी। बिजली के लिए सोलर और विंड इनर्जी की व्यवस्था की जाए। सीसीटीवी ऐसी हो को क्लियर विजन वाला हो और सीसीटीवी का डिजिटल विडियो रेकॉर्डर हो। सीसीटीवी का डाटा 18 महीने तक प्रिजर्व हो ऐसी व्यसव्था की जाए।

‘बाजार के सबसे उम्दा सीसीटीवी लगें’
सुप्ीम कोर्ट ने कहा कि अगर बाजार में 18 महीने तक डाटा प्रिजर्व करने वाला उपकरण उपलब्ध न हो तो राज्यों को ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि वह सबसे ज्यादा समय तक प्रिजर्व करने वाला उम्दा किश्म के सीसीटीवी की व्यवस्था करें। लेकिन रेकॉर्डिंग एक साल से कम वाला न हो। साथ ही राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हलफनामा दायर कर बताएं कि उन्होंने सबसे उम्दा किस्म के सीसीटीवी बाजार से लिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां भी थाने में किसी के साथ बल प्रयोग किया गया हो कोई जख्मी हो गया हो या कस्टोडियल डेथ का मामला हो तो वह शिकायत कर सकता है। शिकायत न सिर्फ एनएचआरसी में बल्कि ह्ययूमैन राइट्स कोर्ट के सामने शिकायत की जा सकती है। कमिशन या कोर्ट थाने से सीसीटीवी फूटेज के लिए समन कर सकता है। जांच एजेंसी के लिए सीसीटीवी फूटेज संरक्षित किया जाएगा।

सीबीआई से लेकर ईडी के दफ्तर में भी लगे
थाने के अलावा सीबीआई, एनआईए, ईडी, एनसीबी, डीआरआई, आदि में लगाया जाए। थाने में सीसीटीवी लगाए जाने के बारे में इंग्लिश और हिंदी के अलावा स्थानीय भाषा में जानकारी उपलब्ध हो कि सीसीटीवी के निगरानेी में हैं। ये बात साफ है कि आम आदमी को अधिकार है कि उसके मानवाधिकार की रक्षा हो। ह्यूमैन राइट्स के उल्लंघन के मामले में एनएचआरसी के अलावा ह्यूमैन राइट्स कोर्ट, अन्य संंबंधित अथॉरिटी और एसपी के सामने भी शिकायत हो सकती है। सीसीटीवी फूटेज छह महीने संरक्षित रखा जाए।

एसएचओ पर रखरखाव की जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार मिला हुआ है और साथ ही संवैधानिक अधिकार है। इसी अधिकार के संरक्षण के लिए ये तमाम आदेश पारित किए गए हैं। 3 अप्रैल 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित किया था लेकिन अभी तक कुछ खास नहीं हो पाया है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा सरकार और संबंधित अथॉरिटी सही भावना से लागू कराए। डीजी को निर्देश दिया जाता है कि एसएचओ को निर्देश दे कि इस बात को सुनिश्चित करे कि सीसीटीवी वर्किंग कंडिशन में हो और एसएचओ डाटा और रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगा।