कृषि कानूनों के किन प्रावधानों पर ऐतराज, सरकार ने किसानों से सब लिखित में मांगा

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नई दिल्ली
सरकार ने कर रहे किसानों के प्रतिनिधियों के साथ मंगलवार को बात की। बैठक भले बेनतीजा रही लेकिन दोनों ही पक्षों ने इसे सकारात्मक बताया है। किसान नेताओं ने समिति बनाने के सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। सरकार ने भारतीय किसान यूनियन के नेताओं से भी अलग से बात की। सरकार ने किसानों से बुधवार तक कानूनों पर क्लॉज दर क्लॉज लिखित में आपत्तियां देने को कहा है। यानी कानून के किन खास हिस्सों, किन खास प्रावधानों पर को आपत्ति है, उन्हें स्पष्ट तौर पर लिखकर दें। गुरुवार को दोपहर 12 बजे होने वाली चौथे दौर की बातचीत में इस पर चर्चा होगी।

3 घंटे से ज्यादा देर तक चली बैठक
किसान संगठनों के 35 से प्रतिनिधियों के साथ 3 घंटे से ज्यादा वक्त तक चली बैठक के बेनतीजा रहने के बाद मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। कृषि मंत्री नरेंद्र सिहं तोमर, रेलवे और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री सोमप्रकाश ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई बैठक में मंत्रियों ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को कृषि सुधार कानूनों के फायदे के बारे में जानकारी दी। सरकार के मुताबिक, इन कानूनों से जुड़े तमाम मुद्दों पर सौहार्दपूर्ण माहौल में विस्तार से चर्चा की गई। तोमर ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और कृषि विकास हमेशा से शीर्ष प्राथमिकता रही है।

कानूनों से जुड़े मसलों की पहचान कर 2 दिसंबर तक दें किसान: सरकार
बयान में बताया गया, ‘बातचीत के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसानों के मुद्दों को सामने रखने और विचार के लिए समिति गठित करने का प्रस्ताव किया ताकि आपसी सहमति से उसका समधान किया जा सके। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि सभी प्रतिनिधि मामले के सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान के लिए सरकार के साथ बातचीत में शामिल होंगे।’ बातचीत के दौरान सरकार ने किसान प्रतिनिधियों को कृषि सुधार कानूनों से संबंधित मसलों को स्पष्ट तौर पर चिन्हित करने और उसे विचार के लिए 2 दिसंबर को रखने को कहा। उसके बाद इन मसलों पर 3 दिसंबर को चौथे दौर की बातचीत में विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में यह आश्वासन दिया गया कि केंद्र हमेशा किसानों के हितों के संरक्षण को लेकर प्रतिबद्ध है और किसानों के कल्याण के लिए बातचीत को हमेशा तैयार है।

समिति बनाने के प्रस्ताव को किसान संगठनों ने किया खारिज
बैठक के बाद अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने एक बयान में कहा कि बातचीत बेनतीजा रही और सरकार का प्रस्ताव किसान संगठनों को मंजूर नहीं है। संगठन के अनुसार जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती, वे अपना विरोध-प्रदर्शन और तेज करेंगे। बैठक के दौरान सरकार ने कानूनों पर चर्चा के लिए समिति बनाने का प्रस्ताव दिया और इसके लिए किसान नेताओं से अपने में से 4-5 लोगों के नाम देने को कहा। किसान नेताओं ने समिति बनाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

भारत किसान यूनियन (एकता उग्राहन) के सदस्य रूपसिंह सनहा ने कहा, ‘किसान संगठनों ने नए कृषि कानूनों से संबंधित मुद्दों पर विचार करने के लिए 5 सदस्यीय समिति बनाने के सरकार के प्रस्ताव को खारिज कर दिया।’ यह संगठन, नए कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों के सबसे बड़े दलों में से है। हालांकि, सरकारी पक्ष का ठोस रुख यह है कि किसानों के मुद्दों पर गौर करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जानी चाहिए और उनकी किसान संगठनों से उम्मीद है कि वे इस प्रस्ताव पर विचार करें।

किसान बोले- चाल चल रही सरकार, समिति के जरिए हमें बांटना चाहती है
सूत्रों ने कहा कि मंत्रियों का विचार था कि इतने बड़े समूहों के साथ बातचीत करते हुए किसी फैसले पर पहुंचना मुश्किल है और इसलिए उन्होंने एक छोटे समूह के साथ बैठक का सुझाव दिया। हालांकि, किसान नेताओं का मानना है कि वह सामूहिक तौर पर ही मुलाकात करेंगे। यूनियन नेताओं ने कहा कि उन्हें आशंका है कि सरकार उनकी एकता और उनके विरोध-प्रदर्शन को तोड़ने की कोशिश कर सकती है। बीकेयू (दाकौंडा) भटिंडा जिला अध्यक्ष बलदेव सिंह ने कहा, ‘सरकार ने हमें बेहतर चर्चा के लिए एक छोटी समिति बनाने के लिए 5-7 सदस्यों के नाम देने के लिए कहा, लेकिन हमने इसे अस्वीकार कर दिया। हमने कहा कि हम सभी उपस्थित रहेंगे।’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘सरकार एक छोटे समूह के लिए जोर दे रही है क्योंकि वे हमें बांटना चाहते हैं। हम सरकार की चालों से बहुत अच्छी तरह से वाकिफ हैं।’

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भारतीय किसान यूनियन से अलग से हुई बात
विज्ञान भवन में बैठक समाप्त होने के तुरंत बाद कृषि मंत्रालय में भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रतिनिधियों के साथ अलग से बातचीत शुरू हुई। सरकार ने कहा कि बीकेयू सदस्यों के साथ बातचीत अच्छे माहौल में हुई और किसानों के सुझावों को ध्यान से सुना गया।

टिकैत बोले- बुधवार को जमा करेंगे शिकायतों का ड्राफ्ट
भारतीय किसान यूनियन के प्रेजिडेंट नरेश टिकैट ने बताया कि वे लोग गुरुवार को कृषि कानून से जुड़े उन मुद्दों पर एक ड्राफ्ट जमा करेंगे, जिन पर उन्हें आपत्तियां हैं। उन्होंने कहा, ‘हम लोग कल कृषि कानूनों से जुड़े अपने मुद्दों पर एक ड्राफ्ट जमा करेंगे। सरकार ने पंजाब, यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली के किसानों के साथ बातचीत शुरू की है। लिहाजा सरकार के पास हमारे मुद्दों पर मंथन करने लिए 3 दिसंबर की सुबह तक का वक्त होगा।’

किसानों की दो टूक- जारी रहेगा आंदोलन
इससे पहले किसान संगठनों के 35 प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान सरकार ने विस्तृत प्रेजेंटेशन के लिए जरिए उन्हें एमएसपी पर आश्वस्त किया। सरकार ने किसान नेताओं को कृषि कानूनों के फायदे बताए। बातचीत बेनतीजा रही लेकिन दोनों ही पक्ष अगले दौर की बातचीत के लिए सहमत हुए। सरकार ने किसानों से अपने आंदोलन को खत्म करने की भी अपील की है लेकिन आंदोलनकारियों का दो टूक कहना है कि उनका विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा।

(एजेंसियों से इनपुट के साथ)