मौत के बाद भी यूं जिंदा है बिकरू हत्याकांड की ‘किलिंग मशीन’ विकास दुबे, कब कसेगी लगाम?

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सुमित शर्मा, कानपुर
कानपुर के () की यादें आज भी ताजा हैं। लोगों को याद है कि कुख्यात अपराधी ने आठ पुलिसकर्मियों को किस तरह से मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद उज्जैन से यूपी लाए जाते वक्त कानपुर से महज 15 किलोमीटर दूर विकास दुबे भी एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया था। इन सबके बीच एक बात बहुत हैरान और परेशान करने वाली है। दरअसल, मौत के बाद भी विकास दुबे ‘जिंदा’ है। जी हां, विकास दुबे लोगों के बीच लोकप्रियता हासिल कर रहा है। कुछ युवाओं में उसकी दीवानगी इतनी है कि सोशल मीडिया पर न जाने कितने फैन पेज संचालित किए जा रहे हैं। यह इशारा है एक नए गैंग के तैयार होने का। हां, यह बात भी समझनी जरूरी है कि इनमें से कुछ ग्रुप्स में तो बड़ी संख्या में युवा जुड़े हुए हैं।

दुर्दांत, कुख्यात अपराधी विकास दुबे ने बीते 2 जुलाई की रात अपने गुर्गो के साथ मिलकर कानपुर के बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा पुलिस टीम के साथ 2 जुलाई की रात हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को दबोचने के लिए बिकरू गांव दबिश देने गए थे। विकास दुबे को दबिश की भनक पहले लग गई थी। विकास दुबे ने सुनियोजित तरीके से पुलिस टीम की घेराबंदी करके पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। इसमें आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद यूपी एसटीएफ और पुलिस ने मिलकर विकास दुबे समेत उसके 6 गुर्गों को एनकाउंटर में मार गिराया था।

मौत के बाद जिंदा कैसे विकास दुबे?
कुख्यात अपराधी विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद युवाओं के बीच तेजी से क्रेज बढ़ा है। कानपुर में विकास दुबे के नाम से फेसबुक पर कई पेज बनाए गए है। फेसबुक पर पंडित , विकास दुबे कानपुर जैसे नामों से पेज बने हैं। इन फेसबुक पेजों पर हजारों की संख्या में युवा जुड़े हैं। विकास दुबे के नाम से पड़ने वाली पोस्ट पर बड़ी संख्या में लाइक, कॉमेंट्स आते हैं। इसके साथ ही लोग इन पोस्ट्स को शेयर भी करते हैं। इन सबके बीच कानपुर पुलिस इस मामले में पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए है।

कुख्यात विकास हीरो कैसे हो गया?
बिकरू हत्याकांड के बाद जिस तरह से विकास दुबे की लोकप्रियता बढ़ी, यह बहुत ही गंभीर विषय है। सवाल यह उठता है कि क्या वजह है जो विकास दुबे का एनकांउटर होने के बाद भी लोग एक अपराधी के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। उसे सोशल मीडिया पर जीवित रखने की ‘साजिश’ चल रही है। कानपुर समेत आसपास के जनपदों के लोग भी फेसबुक पर विकास दुबे के नाम से बने पेज पर तेजी से जुड़ रहे हैं। सवाल यह भी उठता है कि आखिर पेज बनाने वाले का इसके पीछे का क्या उद्देश्य है। सोशल मीडिया पर कई ऐसे पोस्ट भी है, जिसमें विकास दुबे को हीरो बनाया गया है। युवा एक अपराधी से प्रेरणा क्यों ले रहे हैं। आने वाले समय में इसके दुष्परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। इन बातों को समझने के लिए मनोवैज्ञानिक आलोक चांटिया से बातचीत की।

‘युवा पीढ़ी की सोच में बदलाव’मनोवैज्ञानिक आलोक चांटिया के मुताबिक जब बच्चा छोटा होता है, तो वह अपने पैरंट्स से खिलौने में बंदूक मांगता है। वह बच्चा गुड़िया, गाड़ी या फिर और खिलौने नहीं मांगता है। बच्चे को बंदूक ज्यादा प्रभावित करती है। दरअसल, वह विध्वंसक होता है। लेकिन पैरंट्स की जिम्मेदार होती है कि वे बच्चे को बंदूक के विषय में क्या बताते हैं, कि इस बंदूक से देश की रक्षा करोगे। आज का समाज और युवा पीढ़ी की सोच में बदलाव आया है। एक अपराधी उसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है। ऐसा इसलिए है कि वह देख रहा है कि एक बेरोजगार इंसान या फिर आम आदमी दिक्कतों का सामना कर रहा है। वहीं, अपराधियों को जेल में भी रोटी मिल रही है, सभी तरह की सुख सुविधा मिल रही है।

पैरंट्स के लिए खास नसीहत
आलोक चांटिया कहते हैं, ‘इसके साथ ही युवाओं को लगता है कि इस अपराधी की बात नहीं सुनी गई। एक ऐक्सिडेंट में एनकाउंटर कर दिया गया। यही वजह है कि युवा अपराधियों से प्रभावित हो रहे हैं। यह बहुत ही गंभीर विषय है, इस दिशा में समाज, पैरंट्स और सरकार को भी ध्यान देने की जरूरत है। युवाओं के दिमाग में इस तरह की बातें जम जाती हैं।’

हो सकती है जल्द कार्रवाई
इस संबंध में एनबीटी ऑनलाइन ने एसपी ग्रामीण बृजेश श्रीवास्तव से बात की तो उन्होंने कहा, ‘किसी भी अपराधी का महिमा मंडन करना ठीक नहीं है। यदि फेसबुक पर इस तरह के पेज बने है, तो उनपर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में एसपी क्राइम से बात की जाएगी। ऐसे पेजो को ब्लॉक किया जाएगा।’