सालों बाद फिर ‘चर्चा’ में आईं पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, लोगों ने क्यों बताया सबसे खराब राष्ट्रपति?

0
11

नई दिल्ली की दुनिया विचित्र है, यहां कब कौन शख्सियत और कौन सा मुद्दा हो जाए कोई भरोसा नहीं। साल 2007 से 2012 तक देश की राष्ट्रपति रहीं प्रतिभा देवी सिंह पाटिल यूं तो इन दिनों मीडिया की सुर्खियों से दूर हैं, मगर सोमवार शाम को अचानक वह ट्विटर पर ट्रेंड करने लगीं। वजह है एक पोल जिसमें लोगों से देश के अब तक के सबसे अच्छे और सबसे खराब राष्ट्रपति पर उनकी राय पूछी गई थी। पोल के रिप्लाई में सबसे खराब राष्ट्रपति के तौर पर इतने लोगों ने का नाम लिया कि ट्रेंडिंग में आ गईं।

ट्विटर यूजर @Atheist_Krishna ने अपने एक ट्वीट में लोगों से उनके हिसाब से सबसे अच्छे और सबसे खराब राष्ट्रपति पर राय मांगी थी। ज्यादातर यूजर्स ने रिप्लाई में जहां सबसे अच्छे राष्ट्रपति के तौर पर , राजेंद्र प्रसाद, प्रणव मुखर्जी, एस. राधाकृष्णन का नाम लिया तो सबसे खराब राष्ट्रपति के तौर पर इमरजेंसी के दौरान देश के राष्ट्रपति रहे फखरुद्दीन अली अहमद और प्रतिभा पाटिल का नाम प्रमुख तौर पर लिया गया।

राष्ट्रपति पद से हटने के बाद तोहफों पर हुआ विवाद
बता दें कि प्रतिभा पाटिल का राष्ट्रपति के तौर पर कार्यकाल तो विवादों भरा रहा ही, राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी विवादों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। एक विवाद तो बतौर राष्ट्रपति उन्हें मिले बेशकीमती तोहफों को लेकर ही खड़ा हो गया था। दरअसल बतौर राष्ट्रपति उन्हें जितने भी बेशकीमती तोहफे मिले थे वह उन्हें अपने साथ अमरावती लेकर चली गईं। इस पर काफी विवाद हुआ। संविधान विशेषज्ञों ने इसे परंपरा के ठीक उलट बताया क्योंकि इन तोहफों को तोशखाने में जाना चाहिए था।

150 बेशकीमती तोहफों को दिल्ली से अमरावती ले जाया गया था
माना जा रहा है कि पाटिल को अपने कार्यकाल के दौरान 150 से ज्यादा तोहफे मिले। इनमें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरफ से दिया गया एक तोहफा और अमृतसर के स्वर्ण मंदिर का सोने का छोटा प्रतीक भी शामिल थे। इन सभी तोहफों को अमरावती के विद्याभारती कॉलेज के म्यूजियम में रखा गया था। जिसे पाटिल का परिवार संचालित करता है। हालांकि प्रतिभा पाटिल के कार्यालय ने सफाई दी थी कि इन तोहफों को लोन पर लिया गया है और प्रेजिडेंशियल एस्टेट जब चाहे इन्हें वापस ले सकता है। विवाद गहराने पर पाटिल के ट्रस्ट ने इन तोहफों को लौटा दिया था।

गाड़ियों की डिमांड कर विवादों में आई थीं प्रतिभा पाटिल
इसके बाद साल 2015 में प्रतिभा पाटिल एक बार फिर विवादों के कारण सुर्खियों में आईं। ऐसी खबरें आई थीं कि पाटिल सरकार से नियम से ज्यादा अपने लिए सहूलियतों की मांग कर रही हैं। प्रतिभा पाटिल की मांग के मुताबिक, पुणे में वह अपनी निजी गाड़ी का इस्तेमाल करेंगी जिसके रखरखाव और पेट्रोल का खर्च सरकार दे, जबकि पुणे से बाहर जाने के लिए उन्हें सरकारी गाड़ी मिले। सरकारी प्रावधान के मुताबिक, दोनों की इजाजत मुमकिन नहीं थी। होम मिनिस्ट्री ने लगभग तीन महीने के विचार के बाद उनसे एक विकल्प चुनने का आग्रह किया और ऐसा करने के लिए नियम की बाध्यता बताई। इस बारे में मीडिया में खबर आने के बाद इसकी चर्चा सोशल मीडिया में खूब हुई।