क्या कांग्रेस को छोड़ असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM) को अपना रहनुमा मान चुके हैं मुसलमान ?

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नीलकमल, पटना
बिहार विधानसभा के चुनाव में पांच सीटें जीतने के बाद कहा ये जा रहा है कि AIMIM मुसलमानों की राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बन कर उभरी है। इसके अध्यक्ष मुस्लिम समुदाय के सबसे बड़े नेता के रूप में सामने आए हैं। बिहार विधान सभा चुनाव के पहले शायद ही कोई बता सकता था कि भारतीय मुसलमानों का राष्ट्रीय स्तर का कोई नेता है। वैसे लोग जो ये सवाल करते थे कि भारतीय मुसलमानों में लीडरशिप की कमी है लेकिन, अब एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को भारतीय मुसलमानों का एकमात्र लीडर के तौर पर देख रहे हैं।

AIMIM का 1927 से 1957 तक का इतिहास
1927 में ब्रिटिश भारत के हैदराबाद स्टेट में स्थापित मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन की जड़ वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (AIMIM) तेलंगाना राज्य में स्थित एक मान्यताप्राप्त राजनीतिक दल है। AIMIM का प्रधान कार्यालय हैदराबाद के पुराने शहर में स्थित है। इस पार्टी के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी हैं और फिलहाल इस पार्टी के दो सांसद और सात विधायक है। इस पार्टी के इतिहास को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। पहला हिस्सा 1928 में नवाब महमूद नवाज़ खान के हाथों स्थापना से लेकर 1948 तक जब यह संगठन हैदराबाद को एक अलग मुस्लिम राज्य बनाए रखने की वकालत करता था। इस संगठन के संस्थापक सदस्यों में हैदराबाद के राजनेता सैयद कासिम रिजवी भी शामिल थे जो रजाकार नाम के हथियारबंद हिंसक संगठन के सरगना भी थे। एमआईएम को खड़ा करने में इन रजाकारों की अहम भूमिका थी। उस पर 1948 में हैदराबाद स्टेट के भारत में विलय के बाद भारत सरकार ने प्रतिबन्ध लगा दिया था।

AIMIM का 1957 से 2020 तक का इतिहास
AIMIM के इतिहास का दूसरा हिस्सा 1957 में इस पार्टी की बहाली के बाद शुरू हुआ जब मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन नाम में “ऑल इंडिया” जोड़ा गया और पार्टी ने अपने संविधान को बदल दिया। कासिम राजवी ने, जो हैदराबाद राज्य के विरुद्ध भारत सरकार की कारवाई के समय मजलिस के अध्यक्ष थे वे गिरफ्तार कर लिए गए थे। पुलिस से छूटने के बाद उन्होंने पाकिस्तान जाने से पहले अपनी पार्टी की बागडोर उस समय के एक मशहूर वकील अब्दुल वहाद ओवैसी के हवाले कर दिया था। उसके बाद से ही यह पार्टी इसी ओवैसी परिवार के हाथ में रही है। अब्दुल वाहेद के बाद सलाहुद्दीन ओवैसी उसके अध्यक्ष बने और अब उनके बेटे असदुद्दीन ओवैसी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद हैं जबकि उनके छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी विधान सभा में पार्टी के नेता हैं। इस परिवार और पार्टी के नेताओं पर यह आरोप लगते रहे हैं की वो अपने भड़काउ भाषणों से हैदराबाद में साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ावा देते हैं। लेकिन दूसरी और इस पार्टी के समर्थक उसे बीजेपी और दूसरे हिन्दू संगठनों का जवाब देने वाली ताकत के रूप में देखते हैं। राजनीतिक शक्ति के साथ साथ ओवैसी परिवार के पास एक मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज, कई अन्य कालेज और दो अस्पताल भी हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने नेतृत्व के खिलाफ खोला मोर्चा
बिहार विधान सभा चुनाव 2020 में हार के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कांग्रेस के नेता आम लोगों से पूरी तरह से कटे हुए हैं और पार्टी में पांच सितारा संस्कृति अपना ली गई है। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि ब्लॉक से लेकर जिला और राज्य स्तर तक चुनाव कराकर पार्टी के ढांचे में तत्काल बदलाव की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेताओं को कम से कम चुनावों के दौरान पांच सितारा संस्कृति को छोड़ देना चाहिए। संगठनात्मक बदलाव के लिए पत्र लिखने वाले 23 नेताओं में शामिल रहे गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वे अपनी बातो के जरिए सुधारवादी के रूप मुद्दे उठा रहे हैं, न कि विद्रोही के रूप में। उन्होंने कहा कि हम नेतृत्व के खिलाफ नहीं हैं बल्कि, हम सुधारों का प्रस्ताव देकर नेतृत्व के हाथ मजबूत करना चाहते हैं। तो क्या कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले गुलाम नबी आजाद का यह बयान भारत के मुसलमानों को असदुद्दीन ओवैसी के AIMIM की तरफ मोड़ने की कोशिश नही है।

कांग्रेस के दामन पर लगे हैं मुसलमानों के खून के धब्बे : सलमान खुर्शीद
2018 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता और पूर्व कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा था कि उनकी पार्टी और उनके दामन पर मुसलमानों के खून के धब्बे लगे हैं। सलमान खुर्शीद ने यह बयान कांग्रेस शासन के दौरान हुए बाबरी विध्वंस और मुस्लिम विरोधी दंगों को लेकर पूछे गए सवाल पर दिया था। जानकारी के मुताबिक सलमान खुर्शीद ने यह भी कहा था कि हमारे दामन में ख़ून के धब्बे हैं और इसी वजह से आप हमसे ये कह रहे हैं। हालांकि बाद में सफाई देते हुए उन्होंने अपने इस बयान को व्यक्तिगत बयान बता दिया था।

बिहार विधान सभा में AIMIM के विधायक ने जतायी ‘हिंदुस्तान’ शब्द पर आपत्ति
17वीं बिहार विधानसभा में एआईएमआईएम के विधायक अख्तरुल इमान का नाम जैसे ही सदस्यता की शपथ के लिए पुकारा गया वैसे ही उन्होंने खड़े होकर हिंदुस्तान शब्द पर आपत्ति जता दिया। दरअसल अख्तरुल इमान को उर्दू भाषा में शपथ लेना थे लेकिन उर्दू में भारत की जगह हिंदुस्तान शब्द के इस्तेमाल पर उन्होंने आपत्ति जताते हुए प्रोटेम स्पीकर से भारत शब्द का इस्तेमाल करने की गुजारिश की। इसपर सदन के अंदर और बाहर हंगामा मच गया। हालांकि सदस्यता की शपथ लेते वक्त ‘हिंदुस्तान’ शब्द पर आपत्ति जताने वाले AIMIM के विधायक अख्तरुल ईमान ने सदन से बाहर निकलते ही अपने सुर बदल लिए। अख्तरुल ईमान ने सदन के बाहर मीडिया के सामने कहा है कि हिंदुस्तान शब्द पर कोई आपत्ति नहीं जताई बल्कि इतना जरूर कहा कि जब सभी भाषाओं में ‘भारत के संविधान’ शब्द का इस्तेमाल होता है तो फिर उर्दू में भी ऐसा ही होना चाहिए। अख्तरुल ईमान ने कहा कि भारतीय संविधान के प्रस्तावना में जब ‘भारत के लोग’ और भारत का संविधान बोला जा रहा है तो ऐसे में भारत ही बोलना ज्यादा उचित है।

बिहार के बाद पश्चिम बंगाल पर AIMIM की नजर
बिहार विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करते हुए पांच सीटें जीतने के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम अब पश्चिम बंगाल में भी चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी कह चुके हैं कि उनकी पार्टी उत्तरी राज्य के सीमांचल क्षेत्र में न्याय की लड़ाई लड़ेगी। बता दें कि बिहार चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ‘ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट’ (GDA) का हिस्सा थी। इस गठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी शामिल थी। ओवैसी की पार्टी ने बिहार में 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें से पांच पर जीत हासिल की है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार 2020 में बिहार में चार करोड़ से ज्यादा वोटिंग हुई थी और इनमें से 1.24 फीसद वोट एआईएमआईएम को मिले हैं। इसके पहले बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा था और उसे सिर्फ 0.5 फीसदी मत ही हासिल हो पाया था। 2019 बिहार विधान सभा के उप चुनाव में किशनगंज से अमरुल हुदा ने जीत हासिल की थी। 2020 के चुनाव में AIMIM के पांच विधायक अमौर से अख्तरुल ईमान, जोकीहाट से शाहनवाज आलम, बहादुरगंज से मो.अंज़र नईमी, बायसी से सैयद रुकनुद्दीन अहमद, कोचाधामन से मो. इज़हार अस्फी जीत कर विधानसभा पहुंचे है। आपको यह भी बता दें कि कांग्रेस ने 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे लेकिन मुस्लिम बहुल क्षेत्र में भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। तो क्या यह मान लिया जाए कि मुसलमानों का कांग्रेस से मोह भंग हो चुका है।

पश्चिम बंगाल में AIMIM को लेकर मुसलमानों का नजरिया
पश्चिम बंगाल में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को लेकर मुस्लिम युवाओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। बंगाल में अगले वर्ष चुनाव होने हैं, हाल ही में भारी बारिश की वजह से बंगाल में जो तबाही हुई थी। लेकिन राहत ना मिलने की वजह से मुस्लिम इलाके में तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के खिलाफ बेहद आक्रोश देखा जा रहा है। मुस्लिम इलाकों के रहने वाले युवाओं का कहना है कि असदुद्दीन ओवैसी नई सोच के साथ उनके लिए काम करना चाहते हैं इसलिए इस बार वह AIMIM को ही वोट देना चाहते हैं। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की जो स्थिति है मुस्लिम समुदाय के लोग अब कांग्रेस को वोट देकर बीजेपी को फायदा नहीं पहुंचाना चाहते। पश्चिम बंगाल के मुसलमानों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने उनके लिए कुछ नहीं किया लिहाजा इस बार वे ओवैसी की पार्टी को वोट देकर जिताने का काम करेंगे। सूत्र के अनुसार असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को बंगाल में बिहार से भी ज्यादा सीटें मिल सकती है, जो तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस जैसी पार्टियों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।