आयुष मंत्रालय ने किया साफ, 2016 से ही था ये नियम, 58 प्रकार की सर्जरी ही कर पाएंगे आयुर्वेदिक डॉक्टर

0
51

नई दिल्ली
सुबह से ही एक खबर काफी ज्यादा सुर्खियों में थी कि आयुर्वेद के डॉक्टर भी अब जनरल और ऑर्थोपेडिक सर्जरी के साथ आंख, कान और गले की सर्जरी करेंगे। आयुष मंत्रालय ने अब इस खबर में एक स्पष्टिकरण दिया है। मंत्रालय ने साफ किया है कि सरकार ने ये कोई नया नियम लागू नहीं किया है। इसकी घोषणा साल 2016 को ही कर दी गई थी।

आयुष मंत्रालय ने दिया स्पष्टिकरणआयुष मंत्रालय ने एक और बात इसमें जोड़ी जोकि बहुत महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने कहा कि 58 स्पेशल सर्जन डॉक्टर हैं केवल उनको ही ऑपरेशन करने की अनुमति होगी, बाकी कोई भी आयुर्वेदिक डॉक्टर ऑपरेशन नहीं कर सकता। खबर आने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कोई भी आयुर्वेदिक और मान्यता प्राप्त डॉक्टर ऑपरेशन कर सकता है।

पहले भ्रमित हो गए थे लोगआयुर्वेद के विद्यार्थियों को अभी सर्जरी की शिक्षा दी जाती थी, लेकिन उनके सर्जरी करने के अधिकारों को सरकार की ओर से स्पष्ट नहीं किया गया था। सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब आयुर्वेद के सर्जरी में पीजी करने वाले छात्रों को आंख, नाक, कान, गले के साथ ही जनरल सर्जरी के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। इन छात्रों को स्तन की गांठों, अल्सर, मूत्रमार्ग के रोगों, पेट से बाहरी तत्वों की निकासी, ग्लुकोमा, मोतियाबिंद हटाने और कई सर्जरी करने का अधिकार होगा।

लक्ष्मणरेखा लांघने का परिणाम होगा घातक: IMA
इंडियन मेडिकल असोसिएशन ने सीसीआईएम के इस फैसले को एकतरफा और उद्दंडतापूर्ण बताया है। उसने आयुर्वेदिक डॉक्टरों को सर्जरी के अयोग्य बताते हुए सीसीआईएम की कड़ी आलोचना की है। संस्था की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, ‘आईएमए ने लक्ष्मण रेखा खींच रखी है जिसे लांघने पर घातक परिणाम सामने आएंगे।’ उसने आगे कहा, ‘आईएमए, काउंसिल को सलाह देता है कि वो प्राचीन ज्ञान के आधार पर सर्जरी का अपना तरीका इजाद करे और उसमें आधुनिक चिकित्सा शास्त्र पर आधारित प्रक्रिया से बिल्कुल दूर रहे।’

IMA का बड़ा सवाल- NEET का क्या महत्व रह जाएगा
इसके साथ ही, आईएमए ने सरकार से मांग की कि वो ऐसे आधुनिक चिकित्सा शास्त्र के डॉक्टरों की पोस्टिंग भारतीय चिकित्सा के कॉलेजों में नहीं करे। उसने सवाल किया कि अगर इस तरह के शॉर्टकट्स को मान्या दी जाएगी तो फिर NEET का महत्व क्या रह जाएगा? आईएमए ने सरकार से अपील करने के साथ-साथ अपने सदस्यों और बिरादरी के लोगों को भी चेतावनी दी कि वो किसी दूसरी चिकित्सा पद्धति के विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा पद्धति की शिक्षा नहीं दें। आईएमए ने कहा, ‘वो विभिन्न पद्धतियों के घालमेल को रोकने का हरसभव प्रयास करेगा।’ उसने कहा, ‘हरेक सिस्टम को अपने दम पर बढ़ने दिया जाए।’