केंद्रीय कानून को निरस्त कर सकता है हाई कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली ने उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें एपिडेमिक ऐक्ट की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वह इस मामले में हाई कोर्ट क्यों नहीं गए? ऐसे किसी भी कानून को निरस्त करने का हाई कोर्ट को पूरा अधिकार है आप हाई कोर्ट जा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट के पास अधिकार है कि वह इस तरह की याचिका पर सुनवाई कर सकता है। किसी भी कानून के खिलाफ हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल हो सकती है और हाई कोर्ट को किसी भी कानून को निरस्त करने का अधिकार है। याचिकाकर्ता को ऐसे मामले में पहले हाई कोर्ट जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप किस तरह की याचिका लेकर आए हैं। आप एपिडेमिक ऐक्ट को चुनौती देने के लिए क्यों नहीं गए। याचिकाकर्ता से सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप महाराष्ट्र में क्वारंटीन हुए और आप बता रहे हैं कि परेशानी हुई तो ऐक्ट के खिलाफ क्या सीधे सुप्रीम कोर्ट आएंगे। तब याचिकाकर्ता ने कहा कि मैंने एपिडेमिक ऐक्ट को चुनौती दी है और यह केंद्रीय कानून है इसलिए सुप्रीम कोर्ट आया।

तब जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आपको किसने कहा कि हाई कोर्ट नहीं जा सकते। आप पहले लाइब्रेरी जाइये और अनुच्छेद 226 के तहत को देखिये। हाई कोर्ट को केंद्रीय कानून को निरस्त करने का पूरा जूरिडिक्शन है। आप यहां से अर्जी वापस लें और हाई कोर्ट जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का ये कहना कि केंद्रीय कानून के खिलाफ हाई कोर्ट को अधिकार नहीं है। यह बिल्कुल गलत धारणा पर आधारित है। हाई कोर्ट के पास ऐसे मामले में पूरा अधिकार है कि वह केंद्रीय कानून को निरस्त कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम याचिका पर सुनवाई करने के इच्छुक नहीं हैं। तब याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली।