सेना की पोस्टिंग के मामले में हम दखल नहीं देते: सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली
ने कहा है कि आर्म्ड फोर्स और के मामले में वह दखल नहीं देता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि लद्दाख, पूर्वोत्तर राज्यों और अंडमान निकोबार जैसे इलाके की पोस्टिंग कठिन इलाका माना जाता है लेकिन किसी न किसी की तो वहां पोस्टिंग होनी ही होगी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि आपकी शिकायत पोस्टिंग के लिए हो सकती है लेकिन हम ऐसे मामले में दखल नहीं देते।

कोर्ट ने कहा- किसी न किसी की तैनाती तो होगी ही
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने याचिकाकर्ता कर्नल की अर्जी पर सुनवाई के दौरान कहा कि आपको पोस्टिंग को लेकर शिकायत है लेकिन जहां तक सेना में पोस्टिंग का मसला है तो वह ऐसा मामला है जिसमें हम दखल नहीं दे सकते। पूर्वोत्तर राज्य हों या फिर अंडमान निकोबार का इलाका या फिर लद्दाख का इलाका हो लेकिन किसी न किसी की वहां तैनाती तो होगी। याचिकाकर्ता कर्नल की पत्नी भी कर्नल हैं और उनकी पोस्टिंग भटिंडा में है जबकि याचिकाकर्ता कर्नल की पोस्टिंग अंडमान निकोबार हो गया है अभी तक वह जोधपुर में थे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल देने से मना कर दिया।

पत्नी की पोस्टिंग से 3500 किमी दूर हुई है कर्नल की पोस्टिंग
याचिकाकर्ता के वकील रंजीत कुमार ने कहा कि उनकी पत्नी की पोस्टिंग और उनके पोस्टिंग वाले जगह में 3500 किलोमीटर की दूरी है और उनका बच्चा 4.5 साल का है। इस पोस्टिंग के कारण उन्हें VRS लेना पड़ सकता है। ये प्रताड़ना है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लेकिन कोई न कोई तो अंडमान निकोबार जाएगा। हालांकि याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी अर्जी वापस ले ली।