चीन से तनाव के बीच इस महीने के आखिर तक ब्रह्मोस मिसाइलों का ताबड़तोड़ टेस्ट करेगा भारत

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नई दिल्ली
चीन के साथ जारी तनाव (India-China Tension) के बीच भारत हर मोर्चे पर खुद को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत ने अपनी तीनों सेनाओं को अलर्ट पर रखा है। अब इस महीने के आखिरी तक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल () की मारक क्षमता का टेस्ट होगा। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने इस महीने के अंतिम सप्ताह तक हिंद महासागर क्षेत्र में इस मिसाइल के ताबड़तोड़ टेस्ट करेगा।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल अपनी श्रेणी में दुनिया का सबसे तेज ऑपरेशनल सिस्टम है। हाल ही में डीआरडीओ ने मिसाइल प्रणाली की मारक क्षमता को 298 किमी से बढ़ाकर लगभग 450 किमी कर दिया है। सरकारी सूत्रों ने एएनआई को बताया कि परीक्षण से रक्षा सेवाओं को मिसाइल प्रणाली के प्रदर्शन में सुधार करने में मदद मिलेगी।

शौर्य मिसाइल की ताकतपिछले दो महीनों में, DRDO नई और मौजूदा मिसाइल प्रणालियों का परीक्षण करने में सफल रहा है, जिसमें शौर्य मिसाइल प्रणाली शामिल है। भारत ने देश में विकसित, परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम और आवाज की गति से भी तेज चलने वाली ‘शौर्य’ मिसाइल का ओडिशा के परीक्षण रेंज से सफल परीक्षण किया था। रक्षा सूत्रों ने बताया कि इस मिसाइल की मारक क्षमता 700 किलोमीटर से 1,000 किलोमीटर के बीच है और यह 200 किलोग्राम से 1,000 किलोग्राम भार ले जाने में सक्षम है। यह मिसाइल भारत की के-15 मिसाइल का भूमि संस्करण है।

चीन से तनाव के बाद ब्रह्मोस तैनातचीन के साथ संघर्ष शुरू होने के तुरंत बाद स्क्वाड्रन से लैस ब्रह्मोस से लैस विमानों को भी उत्तरी सीमाओं के करीब तैनात किया गया था। पिछले महीने, भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोत आईएनएस चेन्नई से 400 किलोमीटर से अधिक ऊंचे समुद्रों में लक्ष्य पर वार करने की अपनी क्षमता दिखाने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल का परीक्षण फायरिंग किया था।

ब्रह्मोस से घबराता है चीनब्रह्मोस की शक्ति का अहसास इससे भी हो जाता है कि चीनी सेना कहती रही है कि भारत द्वारा अरूणाचल सीमा पर ब्रह्मोस की तैनाती किए जाने से उसके तिब्बत और यूनान प्रांत पर खतरा मंडराने लगा है। यह देश की सबसे आधुनिक और दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल मानी जाती है, जो पहाड़ों की ओट में छिपे दुश्मन के ठिकानों को भी निशाना बना सकती है। भारत जिस प्रकार पिछले कुछ दिनों से एक के बाद सफल मिसाइल परीक्षण कर रहा है, वह टाइमिंग के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है और इसे भारत-चीन के बीच गहरा रहे सीमा विवाद के समय में चीन को कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिका भी पीछेभारतीय वायुसेना और नौसेना के बेड़े में शामिल चुनिंदा सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल ब्रह्मोस के सफल परीक्षणों के बाद तो भारत की सामरिक ताकत काफी बढ़ गई है। यह अमेरिका की टॉम हॉक मिसाइल के मुकाबले करीब चार गुना तेजी से हमला कर सकती है। टॉम हॉक के मुकाबले इसकी प्रारंभिक गतिज ऊर्जा करीब 32 गुना अधिक है।

भारत-रूस ने मिलकर बनाई ब्रह्मोसदुश्मन के लिए बेहद खतरनाक मानी जाने वाली ब्रह्मोस भारत-रूस के संयुक्त प्रयासों द्वारा विकसित की गई अब तक की सबसे भरोसेमंद आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है, जिसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बना दिया है। इसे राफेल तथा सुखोई-30एमकेआई के अलावा नौसेना के मिग-29के में भी तैनात किया जा सकता है। ब्रह्मोस को रूस के एनपीओ मैशिनोस्ट्रोनिया (एनपीओएम) के साथ मिलकर भारत के डीआरडीओ ने तैयार किया है। रूस द्वारा इस परियोजना में प्रक्षेपास्त्र तकनीक उपलब्ध कराई जा रही है जबकि उड़ान के दौरान मार्गदर्शन करने की क्षमता डीआरडीओ द्वारा विकसित की गई है।

आवाज की स्पीड से तेज मिसाइल की स्पीडब्रह्मोस की रेंज पहले 290 किलोमीटर तक थी, जिसे बढ़ाकर 400 किलोमीटर से ज्यादा कर दिया गया है। पलक झपकते ही दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने के लिए ब्रह्मोस को पनडुब्बी, युद्धपोत, लड़ाकू विमान या जमीन से अर्थात् कहीं से भी दागा जा सकता है। यह प्रमुख रूप से पनडुब्बियों, जहाजों और नौकाओं को निशाना बनाने में मददगार साबित होगी। ब्रह्मोस रैमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ध्वनि की रफ्तार से भी तीन गुना तेजी से अपने लक्ष्य पर वार कर सकती है। इसकी रफ्तार करीब 3457 किलोमीटर प्रति घंटा है और इसकी बड़ी विशेषता यह है कि यह आसानी से दुश्मन के रेडार से बच निकलने में सक्षम है। ‘ब्रह्मोस’ नाम दो नदियों, भारत की ब्रह्मपुत्र नदी के ‘ब्रह्म’ और रूस की मोस्क्वा नदी के ‘मोस’ को मिलाकर बना है।