मुंबई में आ सकती है डायबिटीज मरीजों की सुनामी, डॉक्टरों ने जताई आशंका

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मुंबई
महाराष्ट्र में कोरोना (maharashtra corona update) का असर अभी भी जारी है। अभी भी कोरोना संक्रमितों के मामले आ रहे हैं। हालांकि एक्टिव केसेस (corona active cases) में काफी गिरावट भी दर्ज की गई है। वर्ल्ड डायबिटीज़ डे (world diabetes day ) पर डॉक्टरों ने बताया कि कोरोना का सबसे बुरा प्रभाव उन मरीजों पर पड़ सकता है जिन्हें डायबिटीज की शिकायत है। ऐसे मरीजों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।

लॉकडाउन में डायबिटीज पेशेंट्स को हुई काफी दिक्कत
लॉकडाउन के दौरान कई सारे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई मरीज डॉक्टरों के पास भी नियमित जांच करवाने भी नहीं जा पाए। बहुत सारे लोग पार्क में जाकर एक्सरसाइज नहीं कर पाए। जिससे उनका शुगर लेवल मेंटेन रहे। महाराष्ट्र स्टेट टास्क फोर्स के डॉक्टर शशांक जोशी ने बताया कि कोरोना के दौरान जब सब कुछ बंद था। तब डायबिटीज के मरीज कोरोना काल में अपने खानपान पर भी पर्याप्त नियंत्रण नहीं रख सके।

लॉकडाउन में बढ़ा मरीजों का शुगर लेवल
कोरोना महामारी की वजह से भारत में डायबिटीज मरीजों में खासा परिवर्तन देखने को मिला इंपैक्ट इंडिया कैंपेन के आंकड़ों पर अगर ध्यान दें तो यह पता चलता है कि HbA1c का ग्राफ लॉकडाउन में बढ़ा है। जबकि यह नवंबर 2018 से निरंतर घट रहा था। पूरे भारत में जुलाई और सिंतबर के क्वार्टरली HbA1c का प्रतिशत 8.5 रहा है।जबकि नवंबर 2018 में यह 8.6 प्रतिशत था और लगातार घट रहा था। डॉक्टरों की माने तो इस लॉकडाउन की वजह से डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर लेवल वाले मरीजों की सुनामी आ सकती है।

मुंबई में बढ़ा HbA1c का प्रतिशत
मुंबई में भी HbA1c (एक अपरोक्ष डायबिटीज सूचकांक ) में बढ़ोतरी हुई है। जुलाई- सिंतबर के दौरान यह 8.2 प्रतिशत दर्ज किया गया था। यह साल 2019 के अप्रैल और जून महीने के दौरान 8.1 प्रतिशत था। जब मार्च में भारत में कोरोना आया तब डॉक्टरों ने यह पाया कि कई मरीजों का शुगर लेवल काफी बढ़ा हुआ था। मुंबई में जब कोविड19 अपने चरम पर था। तब मुंबई में मरीजों का शुगर लेवल 400 के भी ऊपर था।