भारत-चीन तनाव पर बोला रूस, इससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी, भारत को जल्द से जल्द सौंपेगा S-400 मिसाइल

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नयी दिल्ली
भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति से विश्व के ताकतवर देश भी चिंतित हैं। दोनों देशों की सेनाएं आधुनिक हथियारों के साथ सरहद पर तैनात हैं। एलएसी (Line Of Actual Control) पर बढ़ते हुए तनाव को देखते हुए रूस भी चिंता में है। रूस ने कहा कि अगर भारत-चीन के बीच सीमा पर तनाव बढ़ता है तो पूरे यूरेशिया क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ेगी। इसके साथ ही रूस ने भारत को दिए जाने वाले हथियार S-400 को जल्दी से जल्दी मुहैया करने का आश्वासन भी दिया है।

टेंशन के बीच S-400 बेहद अहमभारत और चीन से तनाव के बीच रूस अगर भारत को S- 400 मिसाइल देता है तो भारत को निश्चित रूप से सैन्य ताकत बढ़ेगी। रूस में “ट्रायम्फ” और नाटो के सदस्यों द्वारा “ग्रोवलर” के रूप में जाना जाने वाला, एस-400 सतह से हवा में मार करने वाली रक्षा प्रणाली दुनिया में सबसे उन्नत सिस्टम में से एक है। मध्यम से लंबी दूरी तक, इसका रडार 400 किलोमीटर (249 मील) की सीमा तक आने वाले विमानों को स्पॉट और ट्रैक कर सकता है और लक्ष्य पर कई मिसाइलों से हमला कर सकता है।

भारत चीन तनाव, रूस चिंतितऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में रूस के उप मिशन प्रमुख रोमन बाबुश्किन ने कहा कि उनका देश स्वाभाविक रूप से एशिया की दो ताकतों के बीच तनाव से चिंतित है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ‘सकारात्मक संवाद’ बहुत महत्वपूर्ण है। भारत और चीन के शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक्स का सदस्य होने का संदर्भ देते हुए बाबुश्किन ने कहा कि जब बहुपक्षीय मंच पर सहयोग की बात आती है तो सम्मानजनक संवाद ही प्रमुख हथियार होता है।

भारत-चीन तनाव का वैश्विक असर उन्होंने कहा, ‘यह स्पष्ट है कि वैश्विक उथल-पुथल और अनिश्चितता के बीच भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता है तो इसका असर यूरेशिया क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ेगा। हमने देखा है कि इस गतिरोध का दुरुपयोग अन्य सक्रिय ताकतों द्वारा अपने भू-राजनीतिक हित के लिए किया जाता है।’ उन्होंने कहा, ‘हम मानते हैं कि हमारे दोनों मित्र एशियाई देशों को और अधिक सकारात्मक संवाद के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है।

चीन से तनावगौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में सीमा पर भारत और चीन के बीच गत छह महीने से गतिरोध बना हुआ है और अब दोनों पक्ष ऊंचाई वाले इलाकों से सैनिकों को पीछे हटाने के प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं। यूरोशिया भी गत कुछ महीनों से प्राथमिक तौर पर कोविड-19 के मामलों के बढ़ने और नागोर्नो-काराबाख इलाके को लेकर आर्मीनिया और आजरबैजान के बीच तनातनी भरे रिश्तों की वजह से उथल-पुथल का सामना कर रहा है।

दोनों के साथ हैं रूस के रिश्तेबाबुश्किन ने कहा, ‘रूस की विशेष स्थिति है क्योंकि उसके विशेष रणनीतिक संबंध भारत और चीन दोनों के साथ हैं और स्वतंत्र प्रकृति के हैं। हम स्वभाविक रूप से भारत और चीन के बीच तनाव से चिंतित हैं।’ उन्होंने कहा,‘हालांकि, हमारा मानना है कि आज नहीं तो कल इसका शांतिपूर्ण समाधान हो जाएगा।’ बाबुश्किन ने कहा, ‘दोनों वैश्विक और जिम्मेदार पड़ोसी ताकतें हैं जिनमें आर्थिक और रक्षा के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं, इसके साथ ही सभ्यतागत समझ है।’

भारत के पास जल्द होगी S-400रूस ने ये भी कहा कि वो भारत के पास जल्द से जल्द S-400 मिसाइल देने के लिए दिन-रात जुटा हुआ है। रूस ने कहा कि भारत को S-400 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की आपूर्ति पहले बैच की डिलीवरी अगले साल के अंत तक हो सकती है। एक ऑनलाइन मीडिया ब्रीफिंग में, रूसी डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रोमन बैबस्किन ने यह भी कहा कि दोनों पक्ष आपसी लॉजिस्टिक सपोर्ट एग्रीमेंट पर काम कर रहे हैं और कई अरब डॉलर के सौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसके तहत एक इंडो-रशियन जॉइंट वेंचर 200 कामोव का- का उत्पादन करेगी।

अक्टूबर 2018 में, भारत ने रूस के साथ एस -400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों की पांच इकाइयों को खरीदने के लिए रूस के साथ 5 बिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।