Bihar Election Result: हारी हुई बाजी को कैसे जीत में बदलेंगे तेजस्वी यादव, समझें

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पटना
की अगुवाई वाली विपक्ष 15 सालों की एंटी इनकंबसी के बाद भी नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए को सत्ता से बाहर करने में विफल रही। लेकिन तेजस्वी यादव ने जो कोशिश की, उसका असर यह जरूर हुआ कि वे इस चुनाव के खुद को अपने पिता के साये से बाहर निकालने में सफल रहे। आरजेडी को न सिर्फ बिहार की अकेले सबसे बड़ी पार्टी बनाया बल्कि सबसे अधिक वोट भी हासिल किए।

तेजस्वी यादव सत्ता के करीब पहुंचकर दूर जरूर हो गए लेकिन लालू प्रसाद यादव के इसे 31 साल के छोटे बेटे के लिए एक बड़ा मंच जरूर तैयार हो गया। जिसे उन्होंने खुद बनाया है। तेजस्वी के करीब लोगों ने बताया कि वे परिणाम से दुखी जरूर हैं लेकिन उन्हें पता है कि राजनीति में मौके का इंतजार किया जाता है।

अब आगे का रास्ता क्या होगा
पार्टी अगले कुछ दिनों में बड़ी मीटिंग कर सकती है। लेकिन 75 विधायकों के चुनने के बाद तेजस्वी यादव ने पिछले कुछ सालों से उनपर उठ रहे सवालों को समाप्त कर दिया। खासकर 2019 आम चुनाव में जब राज्य की 40 लोकसभा सीट में एक भी जीतने में विफल रही थी तब उनपर कई सवाल उठ रहे थे। खासकर पार्टी की पुरानी पीढ़ी उनपर उनकी उपेक्षा का आरोप लगा रही थी।

राजनीति का थीम भी मिल चुका है
जंगल राज का ठप्पा आरजेडी पर उनके विरोधी-आलोचक लगाते रहे हैं और इस चुनाव में कहीं न कहीं इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। लेकिन इससे निकलने का भी रास्ता तेजस्वी को इसी चुनाव में मिल गया। लालू के बिना नौकरी और दूसरे आर्थिक मुद्दे को अपना राजनीतिक हथियार बनाया।

नौकरी आंदोलन’ और ‘समान काम का समान वेतन’ होगाा मुद्दा
पार्टी नेताओं के अनुसार हारने के बावजूद बतौर मुख्य विपक्षी नेता तेजस्वी इन्हीं मुद्दों पर राज्य में राजनीति करते रहेंगे। आरजेडी सांसद और तेजस्वी यादव के करीबी मनोज झा ने चुनाव हारने के बाद बुधवार को कहा कि-‘नौकरी आंदोलन’ और ‘समान काम का समान वेतन’ अब बिहार के जनमानस का अभिन्न हिस्सा हो चुका है। एनडीए येन केन प्रकारेण सरकार तो बना लेंगे लेकिन ‘जागा’ बिहार सत्ता प्रतिष्ठान को अब सोने नहीं देगा। ये इस जनादेश का साफ संदेश है।

संगठन को अगले पांच सालों तक बनाए रखना होगा सक्रिय
हालांकि यह इतना आसान नहीं होगा। सबसे पहली चुनौती तेजस्वी को संगठन को अगले पांच सालों तक सक्रिय बनाए रखना होगा। साथ ही कांग्रेस के साथ लंबे समय तक अगर साथ रखना है तो इसके लिए रणनीति बनानी होगी। इस चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों में मसत्र 19 सीट पर जीतने में सफल रही। इसके लिए अलावा तेजस्वी को कानूनी मोर्चे पर लड़ाई लड़नी है। उनके खिलाफ कुछ मामलों की जांच है तो अगले कुछ दिनों में लालू प्रसाद यादव के बेल पर भी फैसला होना है। इसकी सुनवाई 27 नवंबर को होना है।