उपचुनाव: पूर्वांचल में योगी का किला कितना मजबूत? 2022 से पहले ‘परीक्षा’

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प्रकाशिनी मणि त्रिपाठी, गोरखपुर
यूपी का पूर्वांचल इलाका सियासी रूप से काफी अहम माना जाता है। कहा जाता है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता लखनऊ यानी यूपी से होकर गुजरता है। वहीं बात अगर यूपी की करें तो यहां की सत्ता पर परचम लहराने के लिए पूर्वांचल का बड़ा रोल रहता है। यूपी के सीएम का यह इलाका लंबे अरसे से गढ़ रहा है। कट्टर हिंदुत्ववादी छवि और फायर ब्रैंड नेता के रूप में योगी इस इलाके का सबसे बड़ा चेहरा हैं। ऐसे में मंगलवार को आने वाला देवरिया उपचुनाव का नतीजा 2022 से पहले योगी के लिटमस टेस्ट के रूप में भी देखा जा रहा है। 2017 में पूर्वांचल की 141 में से 11 सीटें जीती थी बीजेपीयूपी की सियासत में पूर्वांचल और योगी एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी मिसाल 2017 के विधानसभा चुनाव में दिखी थी, जब पूर्वांचल के 25 जिलों में से 11 जिलों की सभी विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। इलाके की 141 में से 111 सीटों पर कमल खिला था। विधानसभा चुनाव में बीजेपी के दबदबे और तीन चौथाई बहुमत की खास वजह योगी का इस इलाके में प्रभाव भी था। पूर्वांचल में देवरिया सीट पर टिकीं नजरेंजिन सात सीटों पर उपचुनाव हुआ है, उनमें से देवरिया और मल्हनी सीट पूर्वांचल में आती है। ये दोनों सीटें सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रभाव क्षेत्र की मानी जाती हैं। चुनाव दर चुनाव पूर्वांचल की ज्यादातर सीटों पर योगी फैक्टर काम करता रहा है।
परिसीमन के बाद से देवरिया सीट पर बीजेपी ने दो बार अपना परचम लहराया है। इस सीट से लगातार दो बार बीजेपी प्रत्याशी जन्मेजय सिंह विधायक चुने गए। इस जीत में भी कहीं न कहीं योगी फैक्टर ने काम किया। देवरिया का चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि इस बार यहां से सभी पार्टियों ने ब्राह्मण कैंडिडेट उतारा। हाल ही में ब्राह्मणों के कथित उत्पीड़न का मुद्दा यूपी में छाया रहा। ऐसे में देवरिया में बीजेपी की जीत-हार दोनों के अलग-अलग मायने निकाले जाएंगे। पढ़ें: गोरखपुर उपचुनाव में हार, 1 साल में हिसाब चुकताहालांकि गोरखपुर में 2018 में हुए उपचुनाव में एक बार बीजेपी को शिकस्त भी खानी पड़ी थी। योगी के सीएम बनने के बाद खाली हुई सीट पर बीजेपी ने उपेंद्र शुक्ला को चुनाव लड़ाया था। हालांकि अपने गढ़ में इस हार का सीएम योगी ने एक साल के अंदर हिसाब बराबर कर दिया। 2019 के लोकसभा चुनाव में ऐक्टर रवि किशन शुक्ला को मैदान में उतारकर बीजेपी ने जीत हासिल की।
2022 विधानसभा चुनाव से पहले नतीजे अहमदेवरिया विधानसभा उपचुनाव में कुल 14 प्रत्याशी हैं। मतगणना के लिए 15 डेस्क बनाए गए हैं। इस उपचुनाव के नतीजे को 2022 के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि यहां से विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो जाएगा। करीब सवा साल बाद यूपी में चुनाव होने हैं। 2017 में बीजेपी ने जिस तरह बाकी पार्टियों का सूपड़ा साफ किया था, उस लिहाज से भी इस चुनाव के रिजल्ट पर सियासी विश्लेषकों की नजर होगी।
जाहिर है इस उपचुनाव के रिजल्ट के बाद मिशन-2022 की रेस में दावों का नया दौर शुरू होगा।