सुप्रीम कोर्ट ने देवास-एंट्रिक्स मामले में अमेरिकी अदालत के आदेश को स्थगित किया

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नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने देवास-एंट्रिक्स मामले में मुआवजा के संबंध में अमेरिकी अदालत के आदेश को बुधवार को स्थगित कर दिया। अमेरिकी अदालत ने वर्ष 2005 में हुए उपग्रह संबंधी समझौता रद्द करने के लिए इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स कॉरपोरेशन को बेंगलुरु की कंपनी देवास मल्टिमीडिया को 1.2 अरब डॉलर का मुआवजा देने का आदेश दिया था। जनवरी 2005 में एंट्रिक्स ने दो उपग्रह बनाने, प्रक्षेपित और संचालित करने तथा देवास को 70 मेगाहर्ट्स एस-बैंड स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने का समझौता किया था।

एंट्रिक्स ने फरवरी 2011 में यह समझौता रद्द कर दिया । कंपनी इसका इस्‍तेमाल पूरे भारत में हाइब्रिड सैटेलाइट और क्षेत्रीय संचार सेवाओं के लिए करने वाली थी। अगले कुछ साल तक देवास ने भारत में विभिन्न कानूनी विकल्प खंगाले । उच्चतम न्यायालय ने एक न्यायाधिकरण के पास मामला भेजा था। बुधवार को प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष यह मामला आया।

एंट्रिक्स कॉरपोरेशन की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 27 अक्टूबर के अमेरिकी अदालत के आदेश को स्थगित करने का अनुरोध किया। शीर्ष अदालत ने मेहता का यह अनुरोध भी मान लिया कि दोनों पक्षों के बीच लंबित मामला को दिल्ली उच्च न्यायालय से बेंगलुरु स्थानांतरित किया जाए।