अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बोले, ‘फ्रांस की कार्रवाई से जिन भारतीय मुसलमानों को दिक्कत, वो जाएं पाकिस्तान’

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प्रयागराज
मोदी सरकार द्वारा फ्रांस का समर्थन किए जाने को लेकर दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ़्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी की ओर से जारी किए गए लिखित बयान पर साधु-संतों की सबसे बड़ी संस्था अखिल भारतीय ने कड़ा ऐतराज जताया है। परिषद के अध्यक्ष ने कहा है कि फ्रांस से ज्यादा कट्टर लोग हमारे देश में है। नरेंद्र गिरि ने कहा कि फ्रांस की कार्रवाई को लेकर भारत के जिन मुसलमानों को पीड़ा हो रही है वो देश छोड़कर पाकिस्तान या कहीं और जा सकते हैं।

महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि प्रधानमंत्री का विरोध करने का मतलब है कि भारत के संविधान का विरोध करना है। पीएम के फ्रांस को समर्थन करने का विरोध करने वाले को मौलवियों के खिलाफ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से सख्त कार्रवाई की भी मांग की है। महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि कट्टरपंथियों को देश की विदेश नीति में बोलने का अधिकार नहीं है। इसी तरह से मशहूर शायर मुनव्वर राणा भी धर्मवाद के चक्कर में फंसकर उल्टे सीधे बयान दे रहे हैं। उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो गया है और वे जेल भी जायेंगे। दारुल उलूम देवबंद के मौलानाओं के खिलाफ भी देशद्रोह से भी बड़ी धाराओं में कार्रवाई होनी चाहिए।

मौलाना मुफ़्ती अबुल कासिम नोमानी ने जताया था विरोध
गौरतलब है कि विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मुफ़्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने लिखित बयान जारी कर सरकार के प्रति अफसोस जताया है। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि मोहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी बेहद ही निंदनीय है। भारत सरकार के कदम से देश के 20 करोड़ मुसलमानों की भावनाएं आहत हुई हैं। भारत विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का देश है इसलिए भारत सरकार को उदारवादी कदम उठाने चाहिए।