‘नामर्द हुकूमत… हमें अरब भेजो, पाक नहीं’, UP पुलिस पर यह क्या बोल गए मुनव्वर राना

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लखनऊ
फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद () का विवादित कार्टून बना तो वहां हत्याओं का सिलसिला शुरू हो गया। इसे उर्दू के चर्चित शायर मुनव्वर राना () ने सही बता दिया। सोशल मीडिया पर सवाल और फजीहत शुरू हुई तो राना की तरफ से सफाई भी आई। बयान को लेकर मुनव्वर राना के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में केस दर्ज किया गया है।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर
नवभारत टाइम्स ऑनलाइन की ओर से हिमांशु तिवारी ने मुनव्वर राना से खास बातचीत की। इस दौरान मुनव्वर राना ने यह बात मानी कि हो सकता है कि उन्होंने जो कहा उसका संदेश लोगों के बीच गलत गया है। हालांकि, बातचीत के बीच मुनव्वर राना ने यूपी के पुलिस (UP Police News) महकमे के साथ-साथ केंद्र की मोदी सरकार, प्रदेश की योगी आदित्यनाथ पर भी विवादित टिप्पणी की।

सवाल: लखनऊ के हजरतगंज थाने में आपके खिलाफ केस दर्ज किया गया है, क्या कहना है आपका?
जवाब: इस केस का मेरे बयान से कोई ताल्लुक नहीं है। अगर मेरे बयान में कोई दोष होता तो कोई कायदे का आदमी एफआईआर करता। एक दारोगा, जिसने नकल करके हाई स्कूल पास किया होगा, जो रिश्वत देकर दारोगा बना होगा। वह 50 साल के अनुभव पर एफआईआर करे तो यह हमारी हुकूमत के लिए शर्मनाक है। हमारे डीजीपी और पुलिस कमिश्नर के लिए शर्म की बात है। उससे पूछा जाना चाहिए कि तू कहां से आ गया रिपोर्ट करने के लिए। यह रिपोर्ट उसकी हैसियत नहीं है। उसके पीछे वजीर, उससे बड़े वजीर, उससे बड़े वजीर, उसके बड़े वजीर बहुत लोग उसमें शामिल हैं। इस तरह से मुझे झुकाया नहीं जा सकता है। मेरा व्यक्तित्व विवादित नहीं है। मैंने जिंदगी में मोहब्बत की शायरी की, मां की शायरी की लेकिन मैंने बोला सच है। ऐसा नहीं है कि आप परखेंगे तो वह सच निकलेगा। हम आग बुझाने वालों में हैं।

मुनव्वर राना ने कहा, ‘मैं अभी-अभी कहता हूं कि मजहब की आग बहुत तेज होती है इसमें हाथ नहीं डालना चाहिए। हिंदुस्तान में गाय के नाम पर इतने लोग मारे गए हैं कितने लोगों को फांसी दे दी आपने। आपके केंद्र का वजीर कातिलों को हार पहना रहा है। मेरा बयान विवादित दिखाई दे रहा है। कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर कैसे-कैसे बयान दे रहे हैं, दिल्ली जलवा दिया। जब दिल्ली जलाने वालों पर मुकदमा होने का चांस था तो जज का ट्रांसफर करा दिया। आप किस तमाशे में बैठे हैं। एक शायर की बदनसीबी यही है कि वह मुसलमान है।’

राना कहते हैं, ‘आसान काम यही है कि जो दो-ढाई करोड़ मुसलमान है, उनमें एक-एक को सजा देना, एक को किसी बहाने से पकड़ना…इससे बेहतर तो यह है कि सब पर एकसाथ एनएसए लगाकर उन्हीं के घरों में आग लगा दीजिए। हुकूमत का नाम दुनिया में हो जाएगा। नोबल प्राइज मिल जाएगा। यूं किश्तों में जो आप मुसलमानों का कत्ल कर रहे हैं, किसी भी शख्सियत को आप विवादित बयान कह रहे हैं। एक मामूली पढ़ा लिखा आदमी मुनव्वर राना को कहता है पाकिस्तानी। यह मर्दों की नहीं, नामर्दों (मुनव्वर राना ने हिजड़ों कहा) की हुकूमत है। वरना उससे पूछे कि तू साबित कर कि मुनव्वर राना पाकिस्तानी है। मुझे हुकूमत अगर भेजना चाहती है तो अरब भेजे जहां से हम आए हैं, पाकिस्तान से हमारा कोई ताल्लुक नहीं है। पाकिस्तान से यह ताल्लुक है कि वह हिंदुस्तान का हिस्सा था जो सियासी बेवकूफी की वजह से टुकड़े-टुकड़े होकर रह गया।’

सवाल: आपका बयान था कि मेरी मां या मेरे बाप पर कोई ऐसा कार्टून बनाता तो मैं उसे मार देता?
जवाब: इस मुल्क में जुमले बोले जाते हैं उसे आप जुमला ही मान लें। बात है जुनून की। जहां मजहबी या रिश्तों की पवित्रता भंग होती है वहां कुछ भी हो सकता है। जिस तरह से अपने घर में दाखिल हो और उसकी बहन की इज्जत कोई लूट रहा हो तो वह उसे मार देगा। अब अदालत यह भी सजा दे सकती है कि उसने कत्ल किया है। हां, अगर जज समझा बूझा होगा तो वह यह भी कह सकता है कि इन हालातों में कोई कत्ल ही कर सकता है। माफ नहीं कर सकता है।

सवाल: आप कहते हैं कि मां या बाप पर कोई कार्टून बनाता तो मार देते। एमएफ हुसैन का जिक्र भी आप करते हैं कि हिंदू देवी-देवताओं के चित्रों से छेड़छाड़ की तो ‘बेचारे’ बूढ़े को मुल्क छोड़कर जाना पड़ा। वह ‘बेचारे’ क्यों?

जवाब: यहां जो लफ्ज मैं है वहां मतलब मैं नहीं है। इस तरह की जो परिस्थितियां होती हैं उसमें आदमी पागल हो जाता है। वह कुछ भी कर सकता है। उसमें मजहब है, उसमें रिश्ता है…ये सब चीजें ऐसी हैं कि इन्हें नहीं छेड़ना चाहिए। इसी हिंदुस्तान में कई ऐसे कत्ल हुए हैं कि किसी ने किसी की मां को गाली दी तो कत्ल कर दिया गया। यह जुनून है, जुनून में कोई कुछ भी कर सकता है।

सवाल:
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा तकलीफ हुई है लेकिन कत्ल को सही नहीं ठहराया जा सकता है? लेकिन आपका बयान तो बिल्कुल अलग था।

जवाब: हो सकता है कि मेरी बात का गलत मतलब गया हो। असदुद्दीन ओवैसी एक नेता हैं। उन्होंने पंद्रह हजार करोड़ रुपये कमाए हैं। उनके घर न तो सीआईडी गई, न ईडी गई, ना सीबीआई गई, न कुछ गया क्योंकि वह हमेशा सत्ताधारियों के साथ मिलकर हुकूमत करते हैं। हम राजनीतिक लोग नहीं हैं। हमारा काम सच लिखना है। हां, सच लिखने में हो सकता है कि कुछ लोगों को तकलीफ हो। कोर्ट का कोई भी फैसला हो, जिस पक्ष के खिलाफ फैसला हो वह नाराज होगा, जज के बारे में कुछ भी कह सकता है लेकिन जिसको तकलीफ हो रही है वही उसका एहसास करेगा। उनकी दिक्कत यह है कि उन्हें इलेक्शन लड़ना है। उन्हें समझौता करना है। असदुद्दीन एक दुकान हैं जो मुसलमानों को बेचते हैं। मैंने यह काम नहीं किया। मैंने अपना धर्म नहीं बेचा है।

सवाल: क्या आप मानते हैं कि गलती हुई है, बयान में कुछ हेरफेर हुआ है?

जवाब: मेरा कहना है कि हो सकता है कि मुझसे कोई गलती हुई हो। हम खुदाई किताब नहीं हैं। हम गीता या कुरान नहीं हैं। उसके लिए यह बनाना कि मैं आतंकी हूं, यह पूरी तरह गलत है।

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