कोयला घोटाले में दोषी ठहराए गए पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे को फौरी राहत, हाई कोर्ट ने 3 साल कैद की सजा को निलंबित किया

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नई दिल्ली
कोयला घोटाले में निचली अदालत से दोषी ठहराए गए पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे को सुनाई गई 3 साल कैद की सजा को दिल्ली हाई कोर्ट ने निलंबित कर दिया है। मामला 1999 में झारखंड में एक कोल ब्लॉक के आबंटन में अनियमितताओं से जुड़ा है। हाई कोर्ट के जस्टिस सुरेश कुमार कैत ने रे की सजा को निलंबित करते हुए सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री रे ने अपनी सजा को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में दी है चुनौती
ट्रायल कोर्ट ने सोमवार को 68 साल के पूर्व केंद्रीय मंत्री को सजा का ऐलान किया था। रे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कोयला राज्यमंत्री थे। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें 3 साल की सजा के साथ-साथ उन पर 10 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है।

ट्रायल कोर्ट ने सोमवार को सुनाई थी सजा
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने दिलीप रे को 6 अक्टूबर को दोषी ठहराया था। उन्‍होंने कहा था कि इन लोगों ने कोयला ब्लॉक के आवंटन की खरीद को लेकर एक साथ साजिश रची थी। यह मामला 1999 में कोयला मंत्रालय की 14वीं स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा कैस्ट्रन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के पक्ष में झारखंड के गिरिडीह जिले में 105.153 हेक्टेयर गैर-राष्ट्रीयकृत और परित्यक्त कोयला खनन क्षेत्र के आवंटन से संबंधित है।

कोयला घोटाला मामले में यह पहली सजा
कोयला खदान आवंटन का अपराध साबित होने का यह पहला मामला है जिसमें अधिकतम सजा उम्र कैद है। दिलीप रे को भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (लोकसेवक का विश्वाघात) सहित विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है। दोषियों ने अदालत से उनकी वृद्धावस्था और पहले कभी किसी मामले में दोषी नहीं ठहराये जाने जैसे तथ्य को ध्यान में रखते हुये नरमी बरतने का अनुरोध किया था। हालांकि सीबीआई ने कहा था कि समाज को एक संदेश देने के लिए अधिकतम सजा की जरूरत है, क्योंकि ‘सफेदपोश अपराध’ बढ़ रहे हैं।