दरोगा के दाढ़ी कटवाने पर बढ़ा विवाद, देवबंद के उलेमा बोले- छोड़ देनी चाहिए थी नौकरी

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सैयद मशकूर, सहारनपुर
यूपी के बागपत जिले में तैनात सब इंस्पेक्टर इंतसार अली की दाढ़ी पर शुरू हुआ विवाद थमता नहीं दिख रहा है। सहारनपुर स्थित दारुल उलूम देवबंद के उलेमा ने दरोगा के दाढ़ी रखने और फिर उसे कटवाने को इस्लाम के खिलाफ बताया है। बताते चलें कि पहले इंतसार अली को बिना इजाजत दाढ़ी रखने पर सस्पेंड किया गया था लेकिन जब उन्होंने दाढ़ी कटवाई तो बहाल कर दिया गया।

देवबंद के उलेमा ने कहा कि कि दरोगा को दाढ़ी नहीं बल्कि नौकरी ही छोड़ देनी चाहिए थी। बिना अनुमति दाढ़ी रखने पर बागपत के एसपी ने दरोगा को निलंबित कर दिया था। बाद में इंतसार अली ने अपनी दाढ़ी कटा दी थी तो कप्तान ने उन्हें बहाल कर दिया। देवबंद के उलेमा ने दाढ़ी कटवाने को नाजायज करार दिया है।देवबंद के मदरसा जामिया फातिमा जोहरा एंग्लो अरबिक के मोहतमिम मौलाना लुत्फुर रहमान ने दारोगा इंतशार अली को नसीहत दी है।

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मौलाना लुत्फुर रहमान ने कहा कि मुसलमान अगर दाढ़ी नहीं रखता है तो शरीयत के हिसाब से जुर्म है। वहीं दाढ़ी रखकर कटवा देना तो उससे भी बड़ा जुर्म है।उन्होंने कहा कि अगर बात शरीयत और सुन्नत की आती है तो ऐसे मौके पर दाढ़ी नहीं बल्कि नौकरी ही छोड़ देनी चाहिए थी। शरीयत के हिसाब से उन्होंने बहुत बड़ा जुर्म किया है।

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मौलाना ने कहा कि दाढ़ी के सिलसिले में मैं यही कहूंगा कि मुसलमान का दाढ़ी ना रखना भी जुर्म है और दाढ़ी रखकर कटवा देना और बड़ा जुर्म है। दाढ़ी कटाकर नौकरी या अपने कारोबार को अहमियत देना गलत है। मौलाना ने कहा कि इस्लाम और सुन्नत को तवज्जो ना देकर के किसी कारोबार को करना मैं समझता हूं बिल्कुल गलत है। दूसरी बात यह है कि ऐसे मौके पर अगर कहीं ऐसी बात आती है तो दाढ़ी नहीं बल्कि नौकरी छोड़ देनी चाहिए।