रेकॉर्डतोड़ सीजफायर उल्लंघन, मगर भारत की सीमा में घुस नहीं पाए आतंकी

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श्रीनगर ने कश्मीर में आतंकियों की कराने के लिए इस साल रेकॉर्डतोड़ का उल्लंघन किया। लेकिन बड़ी संख्या में आतंकी घुसने में सफल नहीं रहे। का मानना है कि इस साल आतंकी सर्दियों में भी घुसपैठ की ज्यादा कोशिश कर सकते हैं। इससे निपटने के लिए आर्मी पूरी तरह तैयार है। घुसपैठ निरोधी (एंटी इंफिल्ट्रेंशन) ग्रिड में तैनाती बढ़ाई गई है साथ ही हाइब्रिड फेंसिंग (तारबाड़ी) पर भी काम हो रहा है।

38 बार हुई घुसपैठ की कोशिश
इस साल पाकिस्तान की तरफ से आतंकियों ने घुसपैठ की लगातार कोशिश की लेकिन करीब 27 आंतकी ही घुसपैठ में सफल रहे। जबकि पिछले साल 130 और 2018 में 129 आंतकी घुसपैठ में सफल हुए थे। इंडियन आर्मी ने इस साल अब तक 7 बार आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया, हर कोशिश में 3-5 आतंकी घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। आतंकियों ने इस तरह की कोशिश 38 बार की और घुसपैठ की कोशिश के दौरान इंडियन आर्मी ने 11 आतंकियों को मार भी गिराया। पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ की फिराक में अब भी करीब 300 आतंकियों के लॉन्च पैड में मौजूद होने की जानकारी है।

इस बार सर्दियों में ज्यादा कोशिश
इंडियन आर्मी के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि इस बार आतंकी बड़ी संख्या में घुसपैठ में सफल नहीं हो पाए हैं इसलिए वह सर्दियों में भी इसकी कोशिश करेंगे। मारे गए आतंकियों के पास से स्नो इक्विपमेंट्स मिले जिससे यह साफ है कि वह बर्फबारी के दौरान भी घुसने की फिराक में हैं। उन्होंने कहा कि हमने एलओसी पर सर्विलांस सिस्ट्म मजबूत किया है। लॉग रेंज सर्विलांस सिस्टम लगाया है। दिन और रात हर वक्त मूवमेंट पर नजर रहती है। 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने कहा कि इस बार हम घुसपैठ रोकने में काफी हद तक सफल रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान की तरफ से कोशिशों में कोई कमी नहीं आई। उन्होंने बताया कि इस साल एंटी इनफिल्ट्रेशन ग्रिड में सैनिकों की तैनाती में कुछ बदलाव भी किए गए। यह मल्टी लेयर ग्रिड है। पर अब इसमें सबसे आगे की लेयर में ज्यादा सैनिकों की तैनाती की गई है। जिससे घुसपैठ की ज्यादातर कोशिश नाकाम करने में ग्राउंड फोर्स सफल रही है।

स्मार्ट की जगह अब हाइब्रिड फेंसिंग पर काम
एलओसी पर अभी 700 किलोमीटर की एंटी इनफिल्ट्रेशन फेंसिंग (तारबाड़ी) है। 15-20 फीट ऊंची बर्फ में हर साल यह बहुत सी जगहों पर खराब हो जाती है और हर साल इन्हें रिपेयर करना पड़ता है। पूरे एलएसी पर स्मार्ट फेंसिंग का विचार था और पिछले साल आर्मी की 19 वीं डिविजन में ट्रायल बेस पर कुछ एरिया में स्मार्ट फेंसिंग की भी गई। लेकिन यह बहुत महंगी है। 2.4 किलोमीटर का खर्चा 10 करोड़ रुपये है। बर्फबारी में फेंसिंग खराब होने की दर को देखते हुए अब स्मार्ट फेंसिंग की जगह हाइब्रिड फेंसिंग पर काम हो रहा है। इसमें 1 किलोमीटर का खर्चा 10 लाख रुपये हैं। फेंस को लाइट डिटेक्शन और रेंजिंग सेंसर (एलआईडीएआर), इंफ्रारेड सेंसर और कैमरा से इंटीग्रेड किया जाएगा।