पंजाब में पारित हुआ कृषि बिल के खिलाफ प्रस्ताव, कृषि मंत्री बोले- हम इसकी जांच करेंगे

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नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने संसद के मॉनसून सत्र में कृषि बिल को मंजूरी दी थी। जिसके बाद कांग्रेस ने जमकर बवाल काटा था। कांग्रेस का आरोप था कि सरकार के ये तीनों बिल किसानों की दशा और खराब कर देंगे। इसी बीच पंजाब सरकार ने कृषि संबंधित एक प्रस्ताव पारित कर दिया। इस प्रस्ताव पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

सरकार जांच करेगीकेंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि, मुझे पता चला है कि पंजाब ने कृषि कानून से संबंधित एक प्रस्ताव पारित किया है। लोकतंत्र में, कोई विधानसभा ऐसे फैसले ले सकती है। जब यह भारत सरकार के पास आएगा, तब हम इसकी जांच करेंगे। उन्होंने साफ किया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में किसानों के कल्याण के लिए एक निर्णय लेंगे।

चार विधेयक पारितकांग्रेस ने केंद्रीय कृषि कानूनों को निष्प्रभावी करने के मकसद से पंजाब विधानसभा में चार विधेयकों को पारित किया है। इस पर कांग्रेस पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यह भी कहा कि अगर पंजाब के विधेयकों को अटकाने की कोशिश होती है तो किसानों के प्रति भाजपा सरकार की असंवेदनशीलता को पूरा देश देखेगा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘पंजाब की विधानसभा में कृषि विधेयकों को पारित किए जाने के कारण आज एक ऐतिहासिक दिन है। यह सकारात्मक दिशा में रचा गया इतिहास है।’

पंजाब ने पहल की और विधेयक पारित कियासिंघवी ने कहा, ‘हमने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आदेश के मुताबिक एक आदर्श विधेयक का मसौदा तैयार किया था और सुझाव के तौर पर कांग्रेस शासित राज्यों के पास भेजा गया था। पंजाब ने इसको लेकर पहल की और विधेयक पारित किए।’ उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने अहंकार का परिचय देते हुए हालिया संसद सत्र के दौरान कृषि विधेयकों को पारित किया और यह सब नियमों का उल्लंघन करते हुए किया गया।

ये हैं विधेयकगौरतलब है कि पंजाब विधानसभा ने मंगलवार को चार विधेयक सर्वसम्मति से पारित करने के साथ ही केंद्र के कृषि संबंधी कानूनों के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित किया। विपक्षी शिरोमणि अकाली दल, आप और लोक इंसाफ के विधायकों ने विधेयकों का समर्थन किया। राज्य सरकार के इन विधेयकों में किसी कृषि समझौते के तहत गेहूं या धान की बिक्री या खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर करने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान करता है। इसमें कम से तीन वर्ष की कैद का प्रावधान है।