बॉर्डर पर उकसावे वाली हरकत नहीं करेगा चीन, सेना ने बताया- पीछे हटाने पर क्या बात हुई

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नई दिल्ली
पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चल रहे जबरदस्त तनाव को कम करने के लिए सोमवार को भारत और चीन के बीच सैन्य कमांडर स्तर की सातवीं बातचीत हुई। दोनों देशों की सेनाओं ने संयुक्त बयान में इस बातचीत को ईमानदार, व्यापक और रचनात्मक करार दिया है। बयान में कहा गया है कि चर्चा के दौरान दोनों देशों में एक दूसरे के की स्थिति को लेकर आपसी समझ बढ़ी है।

भारतीय सेना के प्रवक्ता ने बताया, ’12 अक्टूबर को चुशुल में भारत-चीन के सीनियर कमांडरों की सातवें राउंड की बैठक हुई। भारत-चीन सीमा इलाके के वेस्टर्न सेक्टर में एलएसी पर तनाव को कम करने के लिहाज से दोनों पक्षों ने ईमानदार, व्यापक और रचनात्मक चर्चा की। दोनों देश मतभेदों को विवाद में न बदलने देने पर सहमत हुए।

वास्तविक नियंत्रण के भारतीय क्षेत्र में स्थित चुशुल में लगभग 12 घंटे चली वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में संघर्ष के बिंदुओं से सैनिकों को वापस बुलाने के तरीकों पर चर्चा की। भारत और चीन की सेनाएं पूर्वी लद्दाख में सीमा पर पांच महीने से अधिक समय से गतिरोध की स्थिति में हैं।

इंडियन आर्मी के प्रवक्ता ने कहा कि भारत-चीन बातचीत में इस बात पर सहमति बनी कि जल्द से जल्द सैनिकों के पीछे हटने के लिए दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान निकालने के लिए संवाद बनाए रखा जाएगा।

प्रवक्ता ने कहा कि भारत और चीन, सैन्य और राजनयिक माध्यम से संवाद और संपर्क बनाए रखने पर राजी हुए। सेना के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों पक्षों ने रचनात्मक चर्चा की और इस दौरान एक दूसरे की स्थिति के प्रति आपसी समझ बढ़ी। सेना ने कहा कि भारत और चीन अपने नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण समझ को गंभीरता से लागू करने पर सहमत हैं।

एलएसी पर तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत का सिलसिला जारी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर, एनएसए अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे और एयर फोर्स चीफ आरकेएस भदौरिया चीनी अतिक्रमण के मुद्दे से निपटने के लिए सक्रिय हैं।