डिफेक्टिव एयरबैग के चलते एक्सिडेंट में लगी चोट, कार बनाने वाली कंपनी देगी 3 लाख का मुआवजा

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नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली में राज्य उपभोक्ता अदालत ने कार के एयरबैग न खुलने के चलते घायल हुए वादी के हक में फैसला सुनाया है। दरअसल एक्सिडेंट के वक्त कार का एयरबैग नहीं खुलने के कारण सामने वाली सीट पर बैठे दोनों शख्स घायल हो गए। वाहन के एयर बैग में डिफेक्ट होेने के मामले में कार बनाने वाली कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह शिकायती को बतौर मुआवजा कुल 3 लाख रुपये का भुगतान करे। दिल्ली राज्य उपभोक्ता अदालत ने कहा कि वाहन का एयरबैग डिफेक्टिव था ऐसे में शिकायती मुआवजे का हकदार है।

दरअसल मामले में शिकायती शैलेंद्र भटनागर ने दिल्ली राज्य उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया और कार बनाने वाली कंपनी को प्रतिवादी बनाया। शिकायती के मुताबिक उन्होंने 21 अगस्त 2015 को वाहन खरीदी और गाड़ी में तमाम सेफ्टी फीचर बताया गया जिनमें आगे वाली दोनों सीट के एयरबैग की बात कही गई। 16 नवंबर 2017 को शिकायती अपने परिवार के साथ दिल्ली पानीपत हाइवे पर जा रहे थे। हरियाणा में घनौर के पास उनकी गाड़ी का एक्सिडेंट हुआ। एक्सिडेंट के कारण कार डैमेज हुआ लेकिन आगे वाली सीट के एयरबैग नहीं खुले और इस कारण आगे वाली सीट पर बैठे दोनों लोग बुरी तरह से घायल हुए।

कार कंपनी की तरफ से हुई लापरवाही
एयरबैग में डिफेक्ट था इस कारण नहीं खुल पाया और इस कारण शिकायती और उनके परिजन बुरी तरह से घायल हुए। इस मामले में कार बनाने वाली कंपनी को प्रतिवादी बनाते हुए दावा किया गया कि उनकी सेवा में लापरवाही हुई है और ये अनपेयर ट्रेड प्रैक्टिस है। शिकायती ने मेडिकल खर्चा और पेशेवर हानि के एवज में 2 लाख की मांग की। साथ ही मेंटल परेशानी के कारण 20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की।

कोर्ट ने कहा- वादी मुआवजे का हकदार
दिल्ली राज्य उपभोक्ता अदालत की प्रेसिडेंट जस्टिस संगीता ढींगड़ा सहगल की बेंच ने कहा कि मौजूदा केस में कार बुरी तरह से डैमेज हुई है। एयरबैग डिफेक्टिव था इसी कारण वह नहीं खुला जबकि कार की टक्कर हुई थी। तमाम जिरह और तथ्य से साफ है कि वाहन का एयरबैग डिफेक्टिव था और इसी कारण वह काम नहीं कर पाया और ऐसे में प्रतिवादी कंपनी कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत जिम्मेदार है क्योंकि कार बनाने वाली कंपनी का एयरबैग डिफेक्टिव था। ऐसे में शिकायती मुआवजे का हकदार है। मामले में प्रतिवादी कंपनी सेवा में कोताही के लिए जिम्मेदार है।

3 लाख का देना होगा जुर्माना
मामले में हम प्रतिवादी कार बनाने वाली कंपनी को निर्देश देते हैं कि वह शिकायती को मेडिकल खर्चा और आमदनी की हानि के एवज में 2 लाख रुपये का भुगतान करे। साथ ही मानसिक तनाव और मुकदमा खर्च के तौर पर 50-50 हजार रुपये का भुगतान करे। राज्य उपभोक्ता अदालत ने कार बनाने वाली कंपनी से कहा है कि वह कुल 3 लाख रुपये मुआवजा राशि का भुगतान शिकायती को करे।

देना होगा 7 फीसदी ब्याज
अदालत ने कहा कि दो महीने के भीतर प्रतिवादी कार कंपनी इस रकम का भुगतान करे। अदालत ने कहा कि पैसे के पेमेंट में देरी पर इस रकम का 7 फीसदी ब्याज भुगतान करना होगा। उपभोक्ता अदालत ने ये भी निर्देश दिया है कि कार को बदले जाने में देरी होने पर कार की कीमत का 7 फीसदी ब्याज भुगतान करना होगा।