11 साल पहले बच्चे से ट्रेन छूटी, परिवार से बिछड़ा…फिर यूं मिला अपनों से

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मुंबई/सुल्तानपुर
19 साल के फहीम खान के लिए गांधी जयंती का दिन बेहद खास था। 11 साल बाद वह अपने परिवार से मिला। वह लगभग 11 साल पहले अपने परिवार से ट्रेन में यात्रा करने के दौरान बिछड़ गया था। जीआरपीवालों ने उसे एक अनाथालय में रखा था। तब से वह वहीं रह रहा था।

बात 9 मई 2020 की है। फहीम तब आठ साल का था। वह अपने माता-पिता और दो भाई-बहनों के साथ मुंबई से अपने पैतृक घर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जा रहा था। उन्होंने कल्याण से ट्रेन पकड़ी थी।

स्टेशन पर ट्रेन से उतरा और छूट गई ट्रेन
कल्याण और नासिक के बीच उसके माता-पिता सो रहे थे। फहीम को अपना मुंह धोना था। वह नासिक स्टेशन पर उतरा और मुंह धोकर पानी पीने लगा। इसी दौरान ट्रेन चल दी। जब तक वह ट्रेन पकड़ता, ट्रेन चल दी। माता-पिता की जब आंख खुली तो उन्हें फहीम को नासिक स्टेशन पर छूट जाने की बात पता चली।

मां वापस आईं लेकिन बेटा आगे के लिए निकला
फहीम की मां और बेटी ने एक दूसरी ट्रेन पकड़ी और वापस नासिक के लिए निकल पड़े। इधर फहीम ने नासिक से सुल्तानपुर की ट्रेन पकड़ ली। उसे उम्मीद थी कि वह अपने माता-पिता से मिल जाएगा। लेकिन वे लोग बिछड़ गए। फहीम के मामा ने बताया कि वह ट्रेन में रो रहा था। खंडवा स्टेशन पर जीआरपी वालों ने उसे रोते हुए देखा तो उसे पकड़ लिया। उसे नवजीवन चिल्ड्रेंस होम भेज दिया गया।

नासिक में फहीम को ढूंढता रहा परिवार
उसका परिवार उसे नासिक में ढूंढता रहा। वे नासिक के दरगाह, मुंबई रेलवे स्टेशन, शवगृह गए। फहीम उन्हें नहीं मिला तो उन्होंने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई लेकिन वह नहीं मिला। 19 साल का होने पर उसे अनाथालय से छोड़ दिया गया। उसे फहीम से कहा गया कि अब वह बालिग हो गया है और वहां नहीं रह सकता है।

इस तरह मिला फहीम का परिवार
फहीम अनाथालय से निकला, उसने कहा कि उसे सुल्तानपुर जाना है। अनाथालय के एक अधिकारी के साथ वह 1 सितंबर को सुल्तानपुर आया। यहां पर एएसपी शिवराज के साथ उन्होंने संपर्क किया। एएसपी ने सामाजिक कार्यकर्ता गुफरान अहमद सैफी से संपर्क किया। उन्होंने फहीम की तस्वीर और जानकारी दूसरे सोशल वर्कर्स को भेजीं। इसे सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया गया।

तीन घंटे के अंदर मिला परिवार
तीन घंटों के अंदर फहीम के चाचा, मां और बहन आए। मां बेटे एक दूसरे के गले लगकर खूब रोए। मां ने कहा कि उन्होंने तो अब उम्मीद ही खो दी थी कि कभी फहीम से मिल पाएंगी। फहीम ने बताया कि उसका सपना है कि वह फुटबॉलर बने। वह फुटबॉल खेलता है और अब अपने सपने को पूरा करेगा।