चीन के खिलाफ बन रहा है ‘महागठबंधन’, अब मनमानी नहीं कर पाएगा ड्रैगन

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नई दिल्ली
कोरोना महामारी (Corona Pandemic) पर पूरी दुनिया में घिरे चीन की दोस्तों की फेहरिस्त घटती जा रही है और अमेरिका खिलाफ दुनिया के कई बड़े देश अब उसके खिलाफ हो रहे हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत के साथ तनातनी के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। वहीं दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में ड्रैगन कि हिमाकत ने ऑस्ट्रेलिया और जापान को भी चिढ़ा दिया है। ऐसे में चीन के खिलाफ NATO और EU की तरह एक मजबूत मोर्चा बनाने की कवायद काफी तेज हो गई है।

अमेरिका, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया और भारत द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग (क्‍वॉड) को चीन के खिलाफ मजबूत गठबंधन के तौर पर तैयार करने में जुटे हैं। तोक्यो में मंगलवार को इस गठबंधन की आगे की रणनीति पर चर्चा करने वाले हैं। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इन सब मुद्दों पर बात करने के लिए जापान पहुंच गए हैं।

आखिर चीन के खिलाफ क्यों हुए ये देश
दरअसल, चीन की विस्तारवादी नीति के कारण उसके ज्यादातर पड़ोसी देश उससे खफा हैं। भारत और जापान की चीन के साथ सीमा विवाद है। लद्दाख में पिछले करीब 5 महीने से LAC पर दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं। एक छोटी सी चिंगारी भी दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू करवा सकती है। वहीं, अमेरिका और ऑस्‍ट्रेलिया का चीन के साथ ट्रेड वॉर चल रहा है। इस बैठक में 5G और 5G प्लस तकनीक पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है।

कनाडा भी बनेगा मेंबर?
चीन के खिलाफ इस गठबंधन में कनाडा के भी शामिल होने की खबरें हैं। कनाडा की हाल के महीने में भारत के साथ काफी चर्चाएं हुई हैं और उसने SCS में ताईवान के रास्ते एक जंगी जहाज भी भेजा है। माना जा रहा है कि यह चीन के खिलाफ एक संदेश है।

अमेरिका का ड्रैगन के खिलाफ बेहद सख्त रुख
अमेरिका ने चीन के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपना रखा है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने चीन पर अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को खतरे में डालने और दुनिया के माहौल को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा चुके हैं।

भारत-चीन के बीच तनाव चरम पर
इधर, पूर्वी लद्दाख (Ladakh Standoff) में भारत और चीन के बीच तनाव चरम पर है। दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं। भारतीय सेनाओं ने कुछ बेहद अहम ऊंचाई वाले इलाकों में पैठ बनाकर ड्रैगन को बैकफुट पर धकेल दिया है। LAC पर दोनों देशों के कई ब्रिगेड तैनात हैं। सूत्रों के अनुसार, हजारों की संख्या में तैनात सैनिकों के बीच अगर थोड़ी भी गलतफहमी हुई तो स्थिति बहुत ज्यादा बिगड़ सकती है। पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों में लड़ाई के ट्रेंड भारतीय सैनिकों ने लद्दाख में डेरा डाल दिया है। पैंगोंग इलाके में भारत ने बढ़त हासिल कर ली है। ऐसे में नई दिल्ली चीन को अब कोई मौका नहीं देना चाहती है।

जानिए
द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग (क्‍वॉड) की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। हालांकि इसकी शुरुआत वर्ष 2004-2005 हो गई जब भारत ने दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों में आई सुनामी के बाद मदद का हाथ बढ़ाया था। क्‍वाड में चार देश अमेरिका, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया और भारत शामिल हैं। मार्च में कोरोना वायरस को लेकर भी क्वॉड की मीटिंग हुई थी। इसमें पहली बार न्यूजीलैंड, द. कोरिया और वियतनाम भी शामिल हुए थे।

चीन कर रहा है विरोध
इस समूह के गठन के बाद से ही चीन चिढ़ा हुआ है और लगातार इसका विरोध कर रहा है। लद्दाख में चल रहे सैन्‍य तनाव के बीच चीन का सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स भारत को लगातार धमकी दे रहा है। साथ ही नसीहत दे रहा है कि भारत क्‍वॉड से दूर रहे और गुटन‍िरपेक्षता की अपनी नीति का पालन करे।