हाथरस: ‘दलित होना ही हमारा गुनाह…हम चाहते हैं बच्चे यहां से दूर चले जाएं’

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हाथरस के जिस गांव में पीड़िता पली-बढ़ी, वहां पर दो अलग दुनिया बसती हैं। एक, जिसमें वह रहती थी। और दूसरी, जिसमें उच्च जाति के लोग रहते थे। गांव के एक दलित व्यक्ति ने कहा- ‘यह सीमा कभी तोड़ी नहीं गई।’ उसके परिजन कहते हैं कि दलित होना ही हमारा गुनाह है, हम चाहते हैं कि बच्चे यहां से चले जाएं।