हाथरस कांड: ऐक्शन में मानवाधिकार आयोग, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा DCW

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नई दिल्ली
यूपी के हाथरस में 19 साल की दलित युवती के साथ हुई रोंगटे खड़े कर देने वाली हैवानियत का मामला गरमाता जा रहा है। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी (National Human Rights Commission) ने इसे लेकर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार, सूबे के पुलिस मुखिया को नोटिस जारी किया है। वहीं, दिल्ली महिला आयोग (Delhi Human Rights Commission) ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को खत लिखकर दखल की मांग की है। 14 सितंबर को निर्भया जैसी बर्बरता की शिकार युवती ने जिंदगी के लिए संघर्ष करते हुए मंगलवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

एनएचआरसी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, ‘हाथरस जिले में अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाली 19 साल की महिला से हुए गैंगरेप और बर्बरता का आयोग ने संज्ञान लिया है।’ रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़िता 14 सितंबर को लापता हो गई थी और 22 सितंबर को उसे बुरी तरह से जख्मी हालत में पाया गया। उसके साथ गैंगरेप और बर्बरता हुई थी। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस भेजा है।

दूसरी तरफ, दिल्ली महिला आयोग (DCW) की प्रमुख स्वाति मालिवाल ने हाथरस कांड को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस. ए. बोबडे को लेटर लिखकर उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गुजारिश की है जिन्होंने इस कांड में कथित तौर पर लीपापोती की है। मालिवाल ने पत्र में हाई कोर्ट की देखरेख में मामले की जांच और सुनवाई सुनिश्चित कराने, आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिए जाने का भी अनुरोध किया है । यह लेटर सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम भी संबोधित है।

पत्र में मालिवाल ने अपने अनुरोध को सूचीबद्ध करते हुए कहा है, ‘उन सभी पुलिसवालों, वरिष्ठतम अधिकारियों समेत प्रशासनिक अधिकारियों को निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ कठोर कदम उठाया जाए जिन्होंने इस मामले पर लीपापोती का प्रयास किया है। ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए कि किसी और बेटी के साथ इस तरह की घटना नहीं हो।’ यूपी सरकार ने हाथरस कांड की जांच के लिए गृह सचिव की अध्यक्षता में 3 सदस्यों की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है।