खराब क्वाॉलिटी के गोला-बारूद की वजह से आर्मी ने 6 साल में खोए 27 जवान, 960 करोड़ रुपये का भी नुकसान!

0
15

नई दिल्ली
रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड से लिए गए सामान की खराब क्वॉलिटी की वजह से आर्मी ने पिछले 6 साल में यानी 2014 से 2019 के बीच 27 सैनिकों को खोया और 146 सैनिक घायल हुए। इस साल अब तक हादसे में 13 सैनिक घायल हुए हैं। साथ ही इन 6 सालों में 960 करोड़ रुपये कीमत का गोलाबारूद भी नष्ट करना पड़ा जिसकी शेल्फ लाइफ खत्म भी नहीं हुई थी। शेल्फ लाइफ से मतलब गोले-बारूद के इस्तेमाल होने वाली अवधि से है। आर्मी की एक इंटरनल रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया है। जिसमें कहा गया है कि इन 6 सालों में खराब गोला-बारूद की वजह से 403 बार हादसे हुए।

2014 से 2019 के बीच 403 बार हुए हादसे
एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक उत्पादन की खराब क्वॉलिटी की वजह से साल दर साल हादसे हो रहे हैं। ए‌वरेज देखें तो हर हफ्ते एक हादसा हो रहा है। 2014 से 2019 के बीच ही 403 बार हादसे हुए। जिसमें 2014 में 114 बार, 2015 में 86 बार, 2016 में 60 बार, 2017 में 53 बार, 2018 में 78 बार और 2019 में 16 बार हादसे हुए। जिसमें सैनिकों की जान भी गई और जख्मी भी हुए।

6 सालों में 960 करोड़ रुपये मूल्य के गोला-बारूद नष्ट करने पड़े
खराब क्वॉलिटी की वजह से बड़ी संख्या में गोला बारूद नष्ट भी करना पड़ा, जबकि उसकी शेल्फ लाइफ पूरी नहीं हुई थी। अप्रैल 2014 से अप्रैल 2019 के बीच 658.58 करोड़ रुपये का गोलाबारूद नष्ट करना पड़ा। मई 2016 में पुलगांव के सेंट्रल एम्युनिशन डिपो में माइन फटने के हादसे के बाद 303.23 करोड़ रुपये की कीमत की माइंस नष्ट की गईं। सीनियर अधिकारी के मुताबिक 6 साल में इस तरह 960 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अगर हिसाब लगाया जाए तो इतनी कीमत में 155 एमएम की 100 मिडियम आर्टिलरी गन यानी तोपें खरीदी जा सकती थीं।

ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के निगमीकरण की भी चल रही प्रक्रिया
ओएफबी के कॉर्पोरेटाइजेशन (निगमीकरण) की प्रक्रिया भी चल रही है, जिसका शुरू में ट्रेड यूनियन ने विरोध किया था। उनका कहना था कि यह प्राइवेटाइजेशन की दिशा में कदम है। उनकी हड़ताल काफी लंबी चली और फिर सरकार के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस ली।