जानें, क्या है कैट क्यू वायरस जिसके प्रति कर्नाटक से लिए गए 2 सीरम सैंपलों में मिले ऐंटीबॉडीज, क्या इंसानों को भी कर सकता है संक्रमित

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नई दिल्ली
देश में कोरोना वायरस के कहर के बीच चीन से कनेक्शन वाले एक और वायरस ने चिंताएं बढ़ा दी है। भारत में दो सीरम सैंपलों के भीतर कैट क्यू वायरस (Cat Que Virus के प्रति ऐंटीबॉडी मिल चुके हैं, जिसका मतलब है कि संबंधित व्यक्ति शायद संक्रमित होने के बाद ठीक हो चुके हैं। इंग्लिश न्यूज वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस साल जुलाई में इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में छपी स्टडी में वैज्ञानिकों ने बताया है कि 2 ह्यूमन सीरम सैंपल में कैट क्यू वायरस (CQV) के खिलाफ ऐंटीबॉडीज की मौजूदगी मिली है। आइए समझते हैं कि क्या है कैट क्यू वायरस (), भारत के लिए यह वायरस कितना खतरनाक साबित हो सकता है और स्टडी में और क्या-क्या मिला।

स्टडी की मुख्य बातें
पुणे स्थित मैक्सिमम कंटेनमेंट लैब और आईसीएमआर-नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की तरफ से इस स्टडी को 2014 से 2017 के बीच किया गया। कुल 1020 मानव सीरम नमूने इकट्ठे किए गए। ये सभी सैंपल कैट क्यू वायरस (CQV) के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट में नेगेटिव आए। सबसे ज्यादा 806 सैंपल कर्नाटक से लिए गए। महाराष्ट्र से 116, केरल से 51, गुजरात से 27 और मध्य प्रदेश से 20 सैंपल लिए गए। सभी सैंपल नेगेटिव आए थे और उनमें से 833 सैपलों में CQV के प्रति ऐंटीबॉडीज की मौजूदगी का पता लगाने के लिए टेस्ट किया गया। 2014 और 2017 में कर्नाटक से लिए गए 2 सैंपलों में कैट क्यू वायरस के खिलाफ ऐंटीबॉडीज मौजूद मिले।

क्या है कैट क्यू वायरस?
कैट क्यू वायरस चीन में बड़े पैमाने पर क्यूलेक्स मच्छरों और वियतनाम में सुअरों में पाए गए जाते हैं। घरेलू सुअरों को इस वायरस के फैलने के लिए मुख्य तौर पर जिम्मेदार माना जाता है। चीन में सुअरों के भीतर बड़े पैमाने पर इसके खिलाफ ऐंटीबॉडीज मिल चुके हैं। यह इस बात का संकेत है कि स्थानीय स्तर पर वहां वायरस फैल रहा है और उसमें मच्छरों के जरिए सुअरों और दूसरे जानवरों में फैलने की क्षमता है।

भारत में स्टडी की जरूरत क्यों पड़ी?
भारत में इस स्टडी को 2017 से 2018 के दौरान किया गया। इस स्टडी को करने की इसलिए जरूरत पड़ी कि क्यूलेक्स मच्छर की जिस प्रजाति से फैले हैं, वे मच्छर भारत में भी पाए जाते हैं।

क्या खतरनाक है कैट क्यू वायरस?
कैट क्यू वायरस भी खतरनाक है या नहीं, अभी यह स्पष्ट नहीं है। हालांकि, इस समूह के दूसरे वायरस भी मच्छरों के जरिए फैलते हैं और वे मेनिन्जाइटिस, पेडियाट्रिक इंसेफलाइटिस और जेम्सटाउन कैन्योन इंसेफलाइटिस जैसी बीमारियों की वजह बनते हैं।