काम नहीं आई अपील, बादल बोले- कृषि बिलों को राष्ट्रपति की मंजूरी दुर्भाग्यपूर्ण

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चंडीगढ़
कृषि बिलों को लेकर पंजाब, हरियाणा और देश के अलग-अलग हिस्सों में किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बीच ने अध्यादेशों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कृषि बिल कानून बन गए हैं। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने रविवार को इसे निराशाजनक और काफी दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

बादल ने कहा कि इन बिलों का किसान पंजाब में विरोध कर रहे हैं। यह सच में देश के लिए काला दिन है, क्योंकि राष्ट्रपति ने देश की भावना को दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा कि हम काफी आशान्वित हैं कि माननीय राष्ट्रपति इन बिलों को दोबारा विचार करने के लिए संसद में लौटाएंगे। यह मांग अकाली दल और कुछ विपक्षी पार्टियों की है। इससे पहले अकाली दल का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिला था और कृषि बिल को मंजूरी नहीं देने का आग्रह किया था।

नहीं काम आई अपील
इसके अलावा कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने पहुंचे थे। विपक्ष के प्रतिनिधिमंडल की तरफ से गुलाम नबी आजाद राष्ट्रपति से मिले और राष्ट्रपति से अपील की कि सब राजनीतिक दलों से बात करके ही यह बिल लाना चाहिए था। हालांकि, उनकी अपील काम नहीं आई। किसानों और राजनीतिक दलों के लगातार विरोध के बीच राष्ट्रपति ने मॉनसून सत्र में संसद से पास किसानों और खेती से जुड़े बिलों पर अपनी सहमति दे दी है।