क्या उपेंद्र कुशवाहा को गले लगाएंगे नीतीश कुमार ? कभी घर का सामान फिंकवा दिया था

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उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha ) विधानसभा चुनाव ( Bihar Assembly Election 2020 ) से पहले बिहार की राजनीति में एक बार फिर अपना वजन तौलने पर मजबूर हो गए हैं। राजनीति में स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होने की स्थापित परिभाषा के बावजूद उनके लिए नया ठौर पाना टेढी खीर है। एकला चलो की हैसियत तो किसी में नहीं है। 2005 के पहले विधानसभा चुनाव के बाद ही सत्तालोलुप किसी भी दल के लिए ऐसा करना आत्मघाती माने जाना लगा। तब रामविलास पासवान सत्ता का चाबी झुनझुनाते रह गए थे।